Government Of Bihar

Hon'ble Chief Minister of Bihar
Shri Nitish Kumar Hon'ble Chief Minister
Government of Bihar | Official Website

7 निश्चय-1

‘न्याय के साथ विकास’ के सिद्धान्त पर चलते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार के द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मानव विकास, आधारभूत संरचना एवं औद्योगिक प्रोत्साहन एवं निवेश के क्षेत्रों के साथ-साथ वंचित वर्गों के विकास से संबंधित कई कार्यक्रमों को पूर्व में लागू किया गया, जिनसे बहुत कुछ हासिल हुआ है। इन सभी कार्यक्रमों को आगे जारी रखते हुए अपने अनुभवों के आधार पर ’सुशासन के कार्यक्रम, 2015-20’ के तहत ’विकसित बिहार के 7 निश्चय’ को अपनाया गया। सात निश्चय कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की एक मौलिक और नायाब पहल थी।

‘विकसित बिहार के 7 निश्चय’ के अंतर्गत युवाओं, महिलाओं एवं समाज के वंचित वर्ग के विकास हेतु कई कार्यक्रम तय किए गए। सरकार की प्राथमिकता रही है कि सभी राज्यवासियों को न सिर्फ मूलभूत सुविधाएँ यथा- पेयजल, शौचालय एवं बिजली उपलब्ध हो बल्कि आधारभूत संरचनाएँ यथा- सड़क, गली-नाली, पुल आदि का भी विस्तार हो। सात निश्चय के तहत इनके लिए कई कार्यक्रम तय किये गए और इसके साथ ही स्वच्छता, शुद्ध पेयजल एवं ग्रामीण सम्पर्कता के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का सूत्रण किया गया। कई तकनीकी संस्थानां की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया तथा तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर भी पर्याप्त बल दिया गया। 7 निश्चय के कार्यक्रमों को निर्धारित करते समय यह ध्यान रखा गया कि 7 निश्चय की योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से प्राप्त हो ताकि सरकार के ’समावेशी विकास’ के उद्देश्य की प्राप्ति हो सके।

बिहार 7 निश्चय मुख्य योजना - नीतीश कुमार जी

विकसित बिहार के 7 निश्चय – मुख्य दृश्य

निश्चय 1 : आर्थिक हल, युवाओं को बल

इस निश्चय के तहत निम्न योजनाओं/कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा हैः-

  1. बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना
    • राज्य सरकार ने यह महसूस किया कि बड़ी संख्या में बिहार के छात्र आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते थे। 7 निश्चय योजना लागू करते समय बिहार का सकल नामांकन अनुपात (GER) मात्र 13.9 प्रतिशत था, जिसे 30 प्रतिशत ले जाने का सरकार ने लक्ष्य रखा। आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना प्रारंभ की गयी। यह योजना अक्टूबर, 2016 से लागू है। प्रारंभ में बैंकों के माध्यम से इच्छुक छात्रों को ऋण दिलाये जाने का प्रावधान था, परंतु योजना के क्रियान्वयन के दौरान प्राप्त अनुभवों के कारण बैंकों की भूमिका को सीमित करते हुए मार्च, 2018 में संशाधित ‘‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’’ प्रारंभ की गई, जिसमें उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु ऋण के लिए इच्छुक विद्यार्थियों को बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।
    • इस योजना के अंतर्गत 12वीं (पॉलिटेक्निक के लिए 10वीं) उत्तीर्ण इच्छुक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड (BSEFCL) द्वारा दी जा रही है ।
    • आवेदन की तिथि को आवेदक की उम्र अधिकतम 25 वर्ष, स्नातकोत्तर स्तर के वैसे पाठ्यक्रम जिनमें नामांकन की न्यूनतम योग्यता स्नातक है, के लिए उम्र अधिकतम 30 वर्ष।
    • 24.02.2026 * अब बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दिये जाने वाले शिक्षा ऋण की राशि सभी आवदेकों के लिये ब्याज रहित होगी। साथ 2 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण को 60 मासिक किश्तों (5 वर्ष) की जगह अब अधिकतम 84 मासिक किश्तों (7 वर्ष) तथा 2 लाख रुपये से ऊपर ऋण राशि को 84 मासिक किश्तों (7 वर्ष) से बढ़ाकर अधिकतम 120 मासिक किश्तों (10 वर्ष) में वापस करने का प्रावधान किया गया है। उपरोक्त निर्धारित अवधि में नियोजन नहीं होने या स्वरोजगार एवं अन्य साधनों से आय नहीं होने की स्थिति में ऋण वसूली स्थगित रखने का प्रावधान है। इस योजना के सफल कार्यान्वयन से बड़ी संख्या में विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं तथा बिहार का सकल नामांकन अनुपात (GER) भी वर्ष 2021 में 13.9 प्रतिशत से बढ़कर 19.3 प्रतिशत हो गया है।
    • वर्तमान स्थिति * इस योजना के तहत अब तक 4,61,132 आवेदन स्वीकृत हुए हैं, जिनमें सन्निहित राशि 14,114 करोड़ रु० है। अब तक वितरित ऋण की संख्या 4,10,645 एवं वितरित ऋण राशि 8,571 करोड़ रु० है।
  2. मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना
    • बेरोजगार युवाओं को रोजगार तलाशने के क्रम में छोट-मोटे खर्च के लिए भी अभिभावकों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर वंचित वर्ग के युवाओं के लिए यह कठिन था एवं उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ के रूप में था। मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई। इस योजना के तहत राज्य के निवासी 20-25 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले वैसे बेरोजगार युवा जो अध्ययनरत नहीं हों तथा रोजगार की तलाश कर रहे हों एवं जिनकी शैक्षणिक योग्यता इंटर (12वीं) उत्तीर्ण हों परन्तु उच्चत्तर शिक्षा प्राप्त नहीं किए हों, को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसमें युवा आवेदकों को सहायता के तौर पर 1000 रुपये प्रतिमाह की दर से स्वयं सहायता भत्ता दो वर्षों के लिए दिया जाता है।
    • अब इस योजना का लाभ कला, विज्ञान एवं वाणिज्य उत्तीर्ण स्नातक बेरोजगार युवक/युवतियों को भी दिये जाने का निर्णय लिया गया है। 20-25 आयु वर्ग के वैसे स्नातक बेरोजगार युवक/युवती जो कहीं अध्ययनरत नहीं हैं तथा नौकरी/रोजगार हेतु प्रयास कर रहे हैं, उनका कोई स्वरोजगार नहीं है अथवा सरकारी, निजी, गैर-सरकारी नियोजन प्राप्त नहीं है, को भी 1000 रूपये प्रतिमाह की दर से अधिकतम 2 वर्षों तक मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता का भुगतान किया जायेगा।
    • स्वयं सहायता भत्ता प्राप्त करने वाले युवाओं को कुशल युवा कार्यक्रम (भाषा (हिन्दी/अंग्रेजी) एवं संवाद कौशल, बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान एवं व्यवहार कौशल, का अनिवार्य प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि उनको रोजगार मिलने में सहूलियत हो।
    • राज्य के 20 से 25 वर्ष के इंटर (12वीं) उत्तीर्ण बेरोजगार युवाओं को रोजगार तलाशने के दौरान सहायता के तौर पर 1000 रूपये प्रतिमाह की दर से दो वर्षों के लिए स्वयं सहायता भत्ता दी जायेगी ।
    • वर्तमान स्थिति * इस योजना के तहत अब तक 9,67,283 आवेदन स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 9,06,362 को भत्ता का भुगतान किया गया है। अब तक कुल भुगतान की गयी राशि 1,202 करोड़ रु० है।
  3. कुशल युवा कार्यक्रम
    • बिहार के छात्र मेधावी रहे हैं, परंतु बुनियादी कम्प्यूटर ज्ञान, संवाद कौशल एवं भाषाई ज्ञान की कमी के कारण इन्हें रोजगार मिलने में कठिनाई होती थी तथा उन्हें रोजगार मिल जाने की स्थिति में भी कम पारिश्रमिक लेना पड़ता था। युवाओं को भाषा (हिंदी/अंग्रेजी), संवाद कौशल, बुनियादी कम्प्यूटर ज्ञान एवं अन्य कौशल प्रदान कर रोजगार के विभिन्न अवसरों से अवगत कराने एवं उन्हें रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से कुशल युवा कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई।
    • कुशल युवा कार्यक्रम के तहत युवाओं को भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) एवं संवाद कौशल, बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान एवं व्यवहार कौशल का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह प्रशिक्षण क्रमशः 80, 120 एवं 40 घंटे अर्थात कुल 240 घंटे का होता है, जिसे 3 माह में पूरा किया जाना है।
    • वर्तमान स्थिति * इस योजना के तहत अब तक 25,01,629 आवेदकों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है तथा 58,018 आवेदक प्रशिक्षणरत हैं।
  4. 500 करोड़ रु० के वेंचर कैपिटल फण्ड का गठन तथा इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना-
    • युवाओं की उद्यमिता (entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ के स्टार्ट अप कैपिटल फण्ड की स्थापना की गयी है। इसके लिए बिहार स्टार्ट-अप नीति, 2017 दिनांक 17.03.2017 से लागू की गयी थी, जिसकी अवधि 16.03.2022 को समाप्त हो चुकी है। इसके स्थान पर बिहार स्टार्ट-अप नीति, 2022 दिनांक 27.06.2022 से लागू की गयी है।
    • इसमें युवा उद्यमियों को बीज निवेश (seed capital) सहायता के रूप में प्रति स्टार्ट-अप 10 लाख रु0 तक 10 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।
    • वर्तमान स्थिति * अब तक प्रमाणीकृत स्टार्ट-अप की संख्या 1,699 है, जिनमें से कुल 1,202 स्टार्ट-अप को 69.49 करोड़ रु0 की राशि वितरित की गयी है।
  5. सभी सरकारी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निःशुल्क वाई-फाई -
    • इस योजना के तहत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निःशुल्क वाई-फाई के माध्यम से इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है।
    • योजना की समयावधि दिनांक 15.11.2023 को समाप्त हो चुकी है, तदालोक में बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (BELTRON) द्वारा प्रदान की जा रही निःशुल्क वाई-फाई की सेवा दिनांक 16.11.2023 के प्रभाव से समाप्त कर दी गयी है ।
निश्चय 2 : आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार

* राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम था। इसका मुख्य कारण विभिन्न आर्थिक-सामाजिक कारणों से महिलाओं के लिए अवसरों की कमी थी।

* महिला सशक्तिकरण का विषय माननीय मुख्यमंत्री जी की सोच के केंद्र बिंदु में रहा है।

* महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था फरवरी, 2016 से ही लागू कर दी गई है। सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिये जाने के कारण विभिन्न तरह की सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है।

वर्तमान स्थिति * अब तक कुल 3,60,307 महिलाओं की नियुक्ति की गई है। * पुलिस में वर्ष 2013 से अब तक कुल 36,235 महिलाओं (सिपाही, चालक, कक्षपाल) की नियुक्ति की गई है।

निश्चय 3 : हर घर बिजली

* इस निश्चय का उद्देश्य बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक इच्छुक परिवार को बिजली की उपलब्धता प्रदान करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्य में ’मुख्यमंत्री विद्युत संबंध निश्चय योजना’ क्रियान्वित की गयी। इस निश्चय के तहत सभी गांवों का विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा सभी इच्छुक ग्रामीण घरों को विद्युत सम्पर्कता प्रदान की जा चुकी है। कुल 1.63 करोड़ इच्छुक ग्रामीण घरों को विद्युत सम्पर्कता प्रदान की गयी है। यह निश्चय अक्टूबर 2018 में ही पूर्ण किया जा चुका है।

निश्चय 4 : हर घर नल का जल

* बिहार के राज्यवासी पेयजल के लिए चापाकल, कुआँ एवं पेयजल के अन्य साधनों पर निर्भर थे। इन साधनों से प्राप्त पेयजल न तो पूर्ण रूप से पर्याप्त था न ही पूर्णतया शुद्ध। राज्य के विभिन्न क्षेत्र में जल के फ्लोराइड, आर्सेनिक एवं आयरन जैसी अशुद्धियों के कारण पेयजल के रूप में इसके उपयोग से उन क्षेत्रों के निवासी कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे थे। राज्य के सभी घरों में पाइप के माध्यम से स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सितम्बर, 2016 में हर घर नल का जल निश्चय लागू किया गया। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के सभी वार्डों में इस योजना का अनुरक्षण/रख-रखाव किया जायेगा।

ग्रामीण क्षेत्रः-

  • हर घर नल का जल निश्चय के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया कि गुणवत्ता प्रभावित पंचायतों में योजना का कार्यान्वयन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के द्वारा कराया जाएगा। किसी पंचायत में किसी एक वार्ड के भी गुणवत्ता प्रभावित होने की स्थिति में पूरे पंचायत में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के द्वारा ही कार्य कराया जायेगा। वैसे सभी पंचायतों में भी योजना का कार्य लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के द्वारा ही कराया जाएगाए जहाँ पूर्व से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग कार्य करता आ रहा था। इसके अलावा अन्य सभी गैर गुणवत्ता प्रभावित पंचायतों में योजना का क्रियान्वयन पंचायती राज विभाग के द्वारा कराया जाएगा।
  • वर्तमान स्थिति * ग्रामीण क्षेत्रों के 1,14,450 लक्षित वार्डों में से 1,14,202 वार्डों में हर घर नल का जल का कार्य पूर्ण हो गया है तथा कुल 175.87 लाख लक्षित घरों के विरूद्ध 175.48 लाख घरों को आच्छादित कर दिया गया है। बिहार के 30,207 वार्ड गुणवत्ता प्रभावित हैं, इनमें से 4,709 वार्ड आर्सेनिक प्रभावित, 3,789 वार्ड फ्लोराईड प्रभावित एवं 21,709 वार्ड आयरन प्रभावित हैं। लक्षित 30,207 गुणवत्ता प्रभावित वार्डों (47.68 लाख घरों) में से 29,964 वार्डों (47.30 लाख घरों) में तथा लक्षित 26,240 गैर गुणवत्ता प्रभावित वार्डों (36.90 लाख घरों) में से 26,240 वार्डों (36.89 लाख घरों) में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा नल का जल उपलब्ध कराया गया है। पंचायती राज विभाग के तहत लक्षित 58,003 वार्डों (91.29 लाख घरों) में से 57,834 वार्डों (90.87 लाख घरों) में नल का जल उपलब्ध कराया गया है। पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित 169 अपूर्ण वार्डों में से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा 164 वार्डों में कार्य पूर्ण कर 0.42 लाख घरों को नल-जल की सुविधा से आच्छादित किया गया है।

शहरी क्षेत्रः-

  • मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना का क्रियान्वयन नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा किया गया। इसके अंतर्गत राज्य के सभी नगर निकायों में अवस्थित सभी परिवारों को पाईप के माध्यम से नल का जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया।
  • वर्तमान स्थिति * इस योजना के तहत 3,370 वार्डों के 15.81 लाख घरों के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 3,272 वार्डों में कार्य पूर्ण करते हुए 15.21 लाख घरों को नल का जल उपलब्ध करा दिया गया है।
निश्चय-5 : घर तक, पक्की गली नालियां

(1) ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना-

  • ऐसा पाया जाता था कि गांवों के मुख्य भाग तक सम्पर्कता रहती थी परंतु गांवों के टोलों जहां विशेषकर वंचित वर्ग के लोग बसते हैं, में सम्पर्कता का अभाव रहता था जिससे वंचित वर्ग के लोगों को काफी कठिनाई होती थी। इन टोलों को सम्पर्कता प्रदान करने के उद्देश्य से ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना लागू की गई।
  • वर्तमान स्थिति * ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के अंतर्गत 100 से 249 तक की आबादी वाले टोलों को बारहमासी सड़कों के निर्माण द्वारा संपर्कता प्रदान किया गया है। कुल 4,643 टोलों को संपर्कता प्रदान करने के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 3,968.41 कि.मी. पथ का निर्माण कर 4,618 बसावटों में एकल सम्पर्कता दी गयी है।

(2) मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना-

  • ऐसा पाया जाता था कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई बसावटों में पक्की गली एवं जल निकासी की व्यवस्था का अभाव रहता था। इसके कारण लोगों को कीचड़ अथवा जल जमाव से जूझना पड़ता था। विशेषकर वंचित वर्गों के बसावटों में ऐसी स्थिति प्रायः व्याप्त रहती थी। आवागमन के दृष्टिकोण से तो यह असुविधाजनक था ही स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह ठीक नहीं था।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों एवं बसावटों में पक्की गली एवं नाली का निर्माण कराने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना लागू की गयी है। इस योजना का क्रियान्वयन पंचायती राज विभाग द्वारा कराया गया।
  • वर्तमान स्थिति * इस योजना के तहत लक्षित सभी 1 लाख 14 हजार 507 वार्डों में कार्य पूर्ण हो चुका है।

(3) मुख्यमंत्री शहरी नाली-गली पक्कीकरण निश्चय योजना-

  • इस योजना के अंतर्गत नगर निकायों में प्रत्येक घरों को जोड़ने हेतु पक्की गलियों एवं नालियों का निर्माण कराया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में इस योजना का क्रियान्वयन नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा किया जा रहा है।
  • वर्तमान स्थिति * कुल लक्षित 3,369 वार्डों के विरुद्ध 3,351 वार्डों में कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके तहत कुल 3.60 लाख घरों के लक्ष्य से अधिक 8.46 लाख घर आच्छादित किये जा चुके हैं। विदित हो कि शहरी क्षेत्रों में बसावटों-मोहल्लों का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस क्रम में नये बसावटों-मोहल्लों के घरों को संपर्क पथ प्रदान करने के लिये नगर निकायों द्वारा नई योजनायें ली जा रही हैंं। इस कारण मुख्यमंत्री शहरी नाली-गली पक्कीकरण निश्चय योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि का आंकड़ा अधिक प्रदर्शित हो रहा है।
निश्चय-6 : शौचालय निर्माण, घर का सम्मान

खुले में शौच का विषय सीधे तौर पर स्वास्थ्य के साथ-साथ महिलाओं के सम्मान से भी जुड़ा है। इस निश्चय का उद्देश्य खुले में शौच से मुक्त, स्वस्थ एवं स्वच्छ बिहार के लिए राज्य के सभी घरों में शौचालय की व्यवस्था करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस निश्चय का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तथा शहरी क्षेत्रों में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा किया गया है। इसके तहत सभी घरों में शौचालय के निर्माण के साथ-साथ सभी ग्रामीण एवं शहरी परिवारों को शौचालय के नियमित उपयोग के लिए सामूहिक व्यवहार परिवर्तन को भी प्रोत्साहित किया गया है। इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु निम्नलिखित योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया हैः-

(1) लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान

  • ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में यह योजना कार्यान्वित की गई है तथा इस योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले शौचालय की सुविधा से वंचित सभी परिवारों को दिया गया है। इसके तहत कुल 115.60 लाख घर आच्छादित कर सभी पंचायतों, सभी प्रखंडों, सभी अनुमंडलों तथा सभी जिलों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।
  • राज्य सरकार द्वारा लोहिया स्वच्छता योजना के तहत वर्ष 2016 से अब तक कुल 562.05 करोड़ रु0 का व्यय किया गया है।

(2) शौचालय निर्माण (शहरी क्षेत्र) योजना-

  • इस योजना के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों में शौचालय की सुविधा से अनाच्छादित परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है। ऐसे परिवार जिनके घर में शौचालय निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध है, उन्हें व्यक्तिगत शौचालय तथा ऐसे परिवार जिनके घर में शौचालय निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें सामुदायिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
  • वर्तमान स्थिति * सभी लक्षित 3,86,267 वैयक्तिक शौचालय एवं 21,277 (Community) सामुदायिक शौचालय का निर्माण कर सभी शहरी वार्डों एवं सभी नगर निकायों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।
निश्चय-7 : अवसर बढ़े, आगे पढ़ें

* बिहार में उच्च, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों की कमी थी, जिसके कारण विद्यार्थियों के पास इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने के सीमित अवसर थे। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार हमेशा पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा के पक्षधर रहे। इस निश्चय के अंतर्गत राज्य में उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के अवसरों को और बढ़ाने एवं युवाओं को राज्य में ही शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने की दिशा में कार्य किया गया है। इस निश्चय के तहत युवाओं में उच्च शिक्षा के विकास एवं उन्हें राज्य में तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के बेहतर अवसर प्रदान करने हेतु प्रत्येक जिला में जी0एन0एम0 संस्थान, पैरा-मेडिकल संस्थान, पॉलिटेक्निक, महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान एवं अभियंत्रण महाविद्यालय तथा प्रत्येक अनुमंडल में ए0एन0एम0 संस्थान एवं सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लक्ष्य को पूरा करने हेतु कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना का लक्ष्य है। इस निश्चय के तहत राज्य में पाँच नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का लक्ष्य था। 02 मेडिकल कॉलेजों की केन्द्रीय योजना के तहत स्वीकृति मिल जाने के पश्चात अब 03 मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

वर्तमान स्थिति

  1. प्रत्येक जिला में जी०एन०एम० संस्थान - कुल लक्ष्य 38 के विरुद्ध 15 जिलों में पूर्व से जी०एन०एम० संस्थान निर्मित हैं। निश्चय के तहत भवन निर्माण हेतु लक्षित 23 जिलों में से वर्तमान में 19 जिलों में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है एवं अररिया को छोड़कर शेष 18 जिलों में जी०एन०एम० संस्थान संचालित हैं। शेष 4 जिलों में निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  2. प्रत्येक अनुमंडल में ए०एन०एम० संस्थान - कुल लक्ष्य 101 के विरुद्ध 47 अनुमंडलों में पूर्व से ए०एन०एम० संस्थान संचालित हैं। निश्चय के तहत भवन निर्माण हेतु लक्षित 54 अनुमंडलों में से 52 अनुमंडलों में ए०एन०एम० संस्थान का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा डुमरांव (बक्सर) एवं अररिया को छोड़कर 50 अनुमंडलों में संस्थान संचालित हैं। शेष 2 अनुमंडलों में निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  3. प्रत्येक जिला में पारामेडिकल संस्थान - कुल लक्ष्य 38 के विरुद्ध 5 जिलों में पूर्व से पारा-मेडिकल संस्थान संचालित हैं। 33 जिलों में से अब 5 जिलों (नालंदा, सिवान, बांका, समस्तीपुर एवं रोहतास) में पारामेडिकल संस्थान के स्थान पर फार्मेसी कॉलेज की स्थापना का निर्णय लिया गया है। लक्षित शेष 28 जिलों में से 24 पारामेडिकल संस्थान का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है एवं शेष 4 में निर्माण कार्य प्रगति पर है। लक्षित शेष 28 जिलों में से मधेपुरा एवं नवादा को छोड़कर 20 जिलों में पारा-मेडिकल संस्थान का संचालन प्रारंभ हो चुका है।
  4. सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में बी०एससी० नर्सिंग कॉलेज - कुल 16 चिकित्सा महाविद्यालयों में बी०एससी० नर्सिंग कॉलेज का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाना है, जिसमें से पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, पटना के पुनर्निर्माण के कारण योजना को स्थगित कर दिया गया है। निर्माण हेतु शेष लक्षित 15 चिकित्सा महाविद्यालयों में से 9 का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है एवं शेष 6 में निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  5. 5 जिलों में फार्मेसी कॉलेज - 7 निश्चय के तहत 5 जिलों (नालंदा, सिवान, बांका, समस्तीपुर एवं रोहतास) में पारामेडिकल संस्थान के स्थान पर फार्मेसी कॉलेज की स्थापना का निर्णय लिया गया है। लक्षित 5 जिलों में से 4 जिलों में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। समस्तीपुर जिला में निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  6. पांच नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना - इसके तहत कुल 5 जिलों (वैशाली, बेगूसराय, भोजपुर, मधुबनी एवं सीतामढ़ी) में चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना प्रस्तावित थी, जिसमें से 2 जिलों- मधुबनी एवं सीतामढ़ी में चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण कार्य अब केंद्रीय प्रायोजित स्कीम से कराया जा रहा है। वैशाली, बेगूसराय तथा भोजपुर (आरा) में चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण कार्य प्रारंभ है। पूर्व से 6 सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल थे। आज सरकारी प्रक्षेत्र में 11 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कार्यरत हैं। 15 नये मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं।
  7. सभी जिलों में पॉलिटेक्निक संस्थान - 19 जिलों में पॉलिटेक्निक संस्थान पूर्व से संचालित हैं। लक्षित सभी 19 जिलों में संस्थान का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। भवन निर्माण हेतु लक्षित 19 जिलों में से 19 जिलों में भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  8. प्रत्येक जिले में अभियंत्रण महाविद्यालय - 7 जिलों में अभियंत्रण महाविद्यालय पूर्व से संचालित हैं। लक्षित सभी 31 जिलों में संस्थान का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। भवन निर्माण हेतु लक्षित 31 जिलों में से 31 जिलों में भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  9. सभी जिलों में महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान - 7 जिलों में महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पूर्व से संचालित हैं। लक्षित सभी 31 जिलों में संस्थान का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। भवन निर्माण हेतु लक्षित 31 जिलों में से 29 जिलों में भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 2 जिलों में निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन है।
  10. सभी अनुमंडलों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान - 25 अनुमंडलों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पूर्व से संचालित हैं। लक्षित सभी 76 अनुमंडलों में संस्थान का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। भवन निर्माण हेतु लक्षित 76 अनुमंडलों में से 72 अनुमंडलों में भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 4 अनुमंडलों में निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन है।
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