Government Of Bihar

Hon'ble Chief Minister of Bihar
Shri Nitish Kumar Hon'ble Chief Minister
Government of Bihar | Official Website

सात निश्चय-2

सात निश्चय-2  7 निश्चय के सफल क्रियान्वयन से युवाओं को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता भत्ता तथा कुशल युवा कार्यक्रम का लाभ मिल रहा है। महिलाओं को सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। राज्य में हर घर को बिजली, हर घर को नल का जल, हर घर तक पक्की गली-नालियां एवं हर घर में शौचालय के निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। अवसर बढ़े, आगे पढ़े निश्चय के तहत कई तकनीकी संस्थानों की स्थापना की गयी है, जिससे राज्य के छात्र-छात्राओं को राज्य में ही तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में सहूलियत मिली है। इन कार्यक्रमों के सफल संचालन से सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया तथा राज्यवासियों के जीवन स्तर में सुधार आया है।  इन कार्यक्रमों की सफलता एवं इनसे प्राप्त अनुभवों के आधार पर ‘न्याय के साथ विकास’ के सिद्धान्त के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के कुशल नेतृत्व में बिहार के विकास के लिए सुशासन के कार्यक्रम, 2020-25 के तहत सात निश्चय-2 को सम्पूर्ण राज्य में लागू किया गया है। युवाओं, महिलाओं, किसानों तथा समाज के वंचित वर्गों का विकास इन कार्यक्रमों के केन्द्र बिन्दु में है। इस प्रकार 7 निश्चय-2 के अन्तर्गत निम्नांकित महत्वपूर्ण योजनाओं का सूत्रण किया गया है-
बिहार 7 निश्चय मुख्य योजना - नीतीश कुमार जी

विकसित बिहार के 7 निश्चय-2 – मुख्य दृश्य

निश्चय 1 : युवा शक्ति - बिहार की प्रगति

7 निश्चय के तहत बिहार में युवाओं के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं। उच्च शिक्षा के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, युवाओं को रोजगार ढूंढने में मदद करने हेतु स्वयं सहायता भत्ता योजना, युवाओं को कम्प्यूटर, संवाद कौशल एवं व्यवहार कौशल का प्रशिक्षण देने हेतु कुशल युवा जैसे कार्यक्रमों को चलाया गया है। इन सभी कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखा जाएगा। अब इनके साथ-साथ बिहार के युवाओं को और बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें। साथ ही बिहार में उद्यमिता को और बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कि युवा स्वयं उद्यमी बन सकें और अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकें।  

इसके तहत निम्न योजनाओं/कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा हैः-
  • संस्थानों में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना
  • पिछले पाँच वर्षों में जिला एवं अनुमण्डल स्तर पर कई संस्थानों का निर्माण कराया गया है। इसी को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य के प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०)  एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय सेंटर ऑफ एक्सेलेंस बनाया जा रहा है। 
  • इनमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) एवं पॉलिटेक्निक में पढ़ रहे बच्चों को वर्तमान उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप उच्चस्तरीय एवं नई तकनीक वाले क्षेत्रों में, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है यथा सोलर, ड्रोन तकनीक, ऑप्टिकल फाइबर एवं नेटवर्किंग, ट्रांसफॉर्मर मैनुफैक्चरिंग एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी इत्यादि जैसे कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाना है। इन संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त छात्रों की बाजार में मांग रहेगी तथा इन्हें बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
वर्तमान स्थिति
राज्य के प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना-
राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सेन्टर ऑफ एक्सेलेंस स्थापित करने हेतु टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ एकरारनामा किया गया है। सेन्टर ऑफ एक्सेलेंस की स्थापना हेतु कुल 149 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में से प्रथम चरण में 60 तथा द्वितीय चरण में 89 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का चयन किया गया है। 
वर्तमान में प्रशिक्षण हेतु कुल 23 पाठ्यक्रमों का चयन किया गया है तथा प्रशिक्षण पूर्ण करने के पश्चात प्रशिक्षित छात्रों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु 20 औद्योगिक भागीदार (Industry Partner) चिह्नित किये गये हैं।
प्रथम चरण में प्रशिक्षण हेतु चयनित कुल 60 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण प्रारम्भ किया गया, जिसमें अब तक कुल 7,865 छात्र/छात्राओं का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है।
वर्तमान में 4ए539 छात्र/छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कुल प्रशिक्षित छात्र/छात्राओं में से 5,570 को रोजगार उपलब्ध करा दिया गया है। 
द्वितीय चरण के 89 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इनमें 89 में भवन निर्माण हेतु एजेंसी को कार्य आवंटित, जिसमें से 79 में कार्य पूर्ण एवं शेष में कार्य प्रगति पर है।  
राज्य के प्रत्येक पॉलिटेक्निक संस्थान में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना -
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना को नॉलेज पॉर्टनर सहित कार्यान्वयन एजेंसी मनोनीत किया गया है।
44 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में से 11 को हब (बड़े और भारी मशीनों से संबंधित) तथा 33 को स्पोक (छोटे मशीनों से संबंधित) संस्थान के रूप में चयनित किया गया है। 
उद्योग भागीदार के रूप में 5 उद्योग पार्टनर्स के साथ डवन् हस्ताक्षरित किया गया है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शैक्षणिक सत्र 2020-2023, 2021-2024 एवं 2022-2025 में क्रमशः 7289, 8899 एवं 10,522 छात्र/छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। गत् 4 वर्षों में (2022-2023, 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 में माह दिसम्बर, 2025 तक) कुल 16,891 छात्र/छात्राओं का नियोजन किया गया है ।
  • हर जिले में मेगा-स्किल सेन्टर (मार्गदर्शन, नयी स्किल में प्रशिक्षण)
  • वैसे युवा जो आई0टी0आई0 एवं पॉलिटेक्निक में नहीं पढ़ रहे हैं और नए कौशल का प्रशिक्षण पाना चाहते हैं, उनके लिए हर जिले में कम से कम एक मेगा स्किल सेंटर खोलने हेतु कार्रवाई की जानी है। यहाँ पर लोकप्रिय एवं उपयोगी स्किल्स यथा अपैरल मेकिंग, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडिशनिंग, सोलर पैनल मैकेनिक, ब्यूटी एवं वेलनेस ट्रेनिंग, बुजुर्गोंं एवं मरीजों की देखभाल के लिए केयर गीभर जैसे क्षेत्रों में अल्प अवधि का रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाना है, जिनकी बाजार में मांग रहती है।  
वर्तमान स्थिति
राज्य के सभी 38 जिलों में हब एवं स्पोक मॉडल के आधार पर मेगा स्किल सेंटर की स्थापना  करने का निर्णय लिया गया है।
प्रथम चरण में 9 प्रमंडलीय जिलों में वित्तीय वर्ष 2025-26 से आगामी 5 वर्षों में योजना के कार्यान्वयन हेतु कुल 280.87 करोड़ रुपये की लागत से स्थापना हेतु प्रस्ताव मंत्रिपरिषद से स्वीकृत किया गया है। 
प्रथम चरण में सभी 9 प्रमंडलों में मेगा स्किल सेंटर में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रकाशित की गयी है।
  • हर प्रमण्डल में टूल रूम
  • प्रत्येक प्रमण्डल में टूल रूम एवं ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाना है। टूल रूम में कई क्षेत्रों के नवीन एवं अत्याधुनिक मशीनें एक स्थान पर उपलब्ध रहेंगी। इनमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) एवं पॉलिटेक्निक से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को अत्याधुनिक मशीनों पर नई तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। 10वीं एवं 12वीं पास युवकों के लिए भी इनमें दीर्घकालीन प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। इनसे प्रशिक्षण पाने के पश्चात् युवाओं को उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में रोजगार मिलने में सहूलियत होगी। 
वर्तमान स्थिति
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा “हर प्रमंडल में टूल रूम योजना” को उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। 
  • स्किल एवं उद्यमिता हेतु नए विभाग का गठन (आई0टी0आई0/पॉलीटेक्निक सहित)
  • स्किल डेवलपमेंट तथा उद्यमिता पर विशेष बल देने हेतु एक अलग विभाग स्किल डेवलपमेंट एवं उद्यमिता विभाग का गठन किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई0टी0आई0)ए पॉलिटेक्निक को समाहित किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग गठित।   
  • हिन्दी में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास
  • केन्द्र सरकार की योजना के तहत तकनीकी शिक्षा हिन्दी में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। 
वर्तमान स्थिति
पॉलिटेक्निक संस्थानों में हिन्दी में तकनीकी शिक्षा का पठन-पाठन कराया जा रहा है एवं परीक्षा भी हिंदी में देने का विकल्प उपलब्ध है।
अभियंत्रण महाविद्यालयों में भी ।प्ब्ज्म् के सहयोग से हिंदी भाषा में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा दी गयी हैं तथा हिन्दी भाषा में भी पठन-पाठन एवं परीक्षा देने का विकल्प उपलब्ध है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में हिंदी में पठन-पाठन प्रारम्भ कर दिया गया है। 
शैक्षणिक सत्र 2024-25 से मेडिकल संस्थानों में हिंदी भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
  • चिकित्सा, अभियंत्रण एवं खेल विश्वविद्यालय की स्थापना
  • बिहार में चिकित्सा शिक्षा एवं अभियंत्रण शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं एक अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। साथ ही बिहार में खेलकूद को बढ़ावा देने हेतु अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एवं स्पोर्ट्स एकेडमी, राजगीर के परिसर में एक खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। 
वर्तमान स्थिति
चिकित्सा विश्वविद्यालय 
बिहार में चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। 
विश्वविद्यालय के संचालन हेतु कुल 32 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी है, जिनमें से 6 पदों (कुलपति, कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, उच्च वर्गीय लिपिक एवं निम्न वर्गीय लिपिक) पर नियुक्ति की जा चुकी है। स्टेनो, डाटा इन्ट्री ऑपरेटर एवं आई0टी0 ब्यॉय की सेवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से ली जा रही है। 
बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुशल कार्य संचालन हेतु 128 पदाधिकारियोंध् कर्मियों के पद सृजन की कार्रवाई की जा रही है।
वर्तमान में इसका संचालन आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के परिसर में किया जा रहा है। 
बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का परिनियम (ैजंजनजमे) सीनेट द्वारा अनुमोदित, सरकार स्तर से अनुमति प्राप्त किया जा चुका है।
राज्य के सभी सरकारी/निजी चिकित्सा महाविद्यालयों एवं सभी स्वास्थ्य संस्थानों को बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना से संबद्ध कर दिया गया है।
वर्तमान में बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, मीठापुर, पटना का भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है। 
अभियंत्रण विश्वविद्यालय 
बिहार में अभियंत्रण शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। 
विश्वविद्यालय के संचालन हेतु तत्काल आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में छठे तल को आवंटित किया गया है। विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के रूप में बस स्टैंड मीठापुर में कुल 5 एकड़ भूमि शिक्षा विभाग, बिहार द्वारा आवंटित की गई है। विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
विश्वविद्यालय के सफल संचालन हेतु कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक तथा वित्त पदाधिकारी सहित कुल 17 पदों पर नियुक्ति की गयी है।
खेल विश्वविद्यालय की स्थापना
राजगीर में निर्माणाधीन राज्य खेल अकादमी-सह-अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की अवसंरचनाओं में खेल विश्वविद्यालय का संचालन किया जा रहा है।
खेल विश्वविद्यालय के संचालन हेतु कुल 275 पदों का सृजन किया गया है, जिसमें कुलपति, रजिस्ट्रार एवं परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति की गयी है। शेष नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं।
बिहार खेल विश्वविद्यालय का लोकार्पण 29.08.2024 को किया जा चुका है।
बिहार खेल विश्वविद्यालय के संचालन हेतु प्रथम सामान्य परिषद्, प्रथम कार्य परिषद् तथा प्रथम एकेडमी एवं एक्टिविटी परिषद् का गठन किया जा चुका है।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में खेल प्रशिक्षण के स्नातकोत्तर डिप्लोमा (एथलेटिक्स-20 सीट एवं क्रिकेट-20 सीट) की पढाई आरम्भ की जा चुकी है। 
बिहार खेल विश्वविद्यालय देश में सरकारी खेल विश्वविद्यालयों की रैकिंग में चौथे स्थान पर है।
  • उद्यमिता विकास हेतु अनुदान/प्रोत्साहन
  • युवाओं के लिए न सिर्फ उच्च स्तर के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है बल्कि उनको अपना उद्यम/व्यवसाय लगाने के लिए सरकार ने मदद करने का निर्णय लिया है। नया उद्यम अथवा व्यवसाय के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा तथा अधिकतम 5 लाख का ऋण मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर दिया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
मुख्यमंत्री अनुसूचितजाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी योजना वर्ष 2018 से लागू है।
इस योजना में वर्ष 2020 से अति पिछड़े वर्ग को शामिल करते हुए मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना प्रारंभ की गयी।
इन योजनाओं में उद्यमियों को 10 लाख रूपये तक की सहायता दी जाती है जिसमें 5 लाख रूपये का अनुदान एवं 5 लाख रूपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।
वर्ष 2021 में ही सात निश्चय-2 के तहत अन्य वर्गों (सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग) के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना शुरू की गयी जिसमें 5 लाख रूपये का अनुदान एवं 1 प्रतिशत ब्याज पर 5 लाख रूपये का ऋण दिया जाता है।
उक्त योजनाओं के अतिरिक्त वर्ष 2023 में राज्य के अल्पसंख्यक वर्ग के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना की स्वीकृति दी गयी है।
मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/जनजाति उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 11,441 के विरुद्ध 11,024 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 9,121 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 283.50 करोड़ रु०, 6,677 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 270.27 करोड़ रु० एवं 3,896 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में   76.54 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 630.21 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 12,129 के विरुद्ध 10,524 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 8,487 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 267.62 करोड़ रु०, 6,525 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 264.76 करोड़ रु० एवं 3,949 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 77.05 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 609.43 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है। 
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 11,991 के विरुद्ध 10,982 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 8,743 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 274.69 करोड़ रु०, 6,473 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 262.47 करोड़ रु० एवं 3,868 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 75.19 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 612.35 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है। 
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2023-24 से अब तक लक्षित 2,860 के विरुद्ध 2,685 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 2,087 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 37.98 करोड़ रु०, 1,184 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 50.67 करोड़ रु० एवं 510 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 9.78 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 98.43 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
बिहार लघु उद्यमी योजना  :- वर्ष 2023-24 से अब तक लक्षित 1,09,901 के विरुद्ध 96,350 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 71,740 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 358.67 करोड़ रु० एवं 22,841 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 228.41 करोड़ रु० (दोनों क़िस्त मिलाकर कुल 587.08 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
सामान्य वर्ग के अंतर्गत 10,584 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 7438 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 37.18 करोड़ रुपये एवं 2495 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 24.95 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 62.13 करोड़ रुपये है।
अनुसूचित जाति के अंतर्गत 24,227 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 17,297 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 86.48 करोड़ रुपये एवं 4910 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 49.10 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 135.58 करोड़ रुपये है।
अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत 1590 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 1115 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 5.57 करोड़ रुपये एवं 265 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 2.65 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 8.22 करोड़ रुपये है।
पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत 25,483 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 20,403 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 102.01 करोड़ रुपये एवं 6327 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 63.27 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 165.28 करोड़ रुपये है।
अति पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत 34,466 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 25,487 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 127.43 करोड़ रुपये एवं 8844 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 88.44 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 215.87 करोड़ रुपये है।
  • रोजगार के 20 लाख से ज्यादा नए अवसर का सृजन
  • सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्र में रोजगार के 20 लाख से ज्यादा नये अवसर सृजित करने का निर्णय लिया गया है। 
वर्तमान स्थिति
रोजगार के नए अवसरों के सृजन के तहत अब तक सरकारी क्षेत्र में नियमित पदों पर 7,95,832 की नियुक्ति तथा संविदा आधारित पदों पर 1,17,784 एवं बाह्य स्रोत पर 70,525 अर्थात कुल 9,84,141 कर्मियों की नियुक्ति/नियोजन किया गया है। इसी प्रकार गैर सरकारी क्षेत्रों में अब तक कुल 44,37,729 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है। 
निश्चय 2 : सशक्त महिला, सक्षम महिला
  • महिला उद्यमिता हेतु विशेष योजना
  • महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना लाने का निर्णय लिया गया है जिसमें उनके द्वारा लगाए जा रहे उद्यमों में परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रूपये तक का अनुदान तथा अधिकतम 5 लाख रूपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जायेगा।
  • महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना प्रारंभ की गयी है। इसके तहत महिला उद्यमियों द्वारा लगाए जा रहे उद्यमों में परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रूपये तक का अनुदान तथा अधिकतम 5 लाख रूपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति
इस योजनान्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 11,343 के विरुद्ध 11,035 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 8,978 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 279.75 करोड़ रु०, 6,546 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 267.43 करोड़ रु० एवं 3,749 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 73.69 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 620.87 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
  • उच्चतर शिक्षा हेतु महिलाओं को प्रोत्साहन
  • उच्चतर शिक्षा हेतु प्रेरित करने के लिये इन्टर उत्तीर्ण होने पर अविवाहित महिलाओं को रू0 25,000 तथा स्नातक उत्तीर्ण होने पर महिलाओं को रू0 50,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
वर्तमान स्थिति
इन्टर/समकक्ष उत्तीर्ण अविवाहित महिलाओं के लिए रु० 25,000 की दर से वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक 13,31,703 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2024-25 में 5,05,340 छात्राओं और वर्ष 2025-26 में अब तक 4,77,526 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है।
स्नातक/समकक्ष उत्तीर्ण महिलाओं के लिए रु० 50,000 की दर से वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक 3,72,000 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2024-25 में 2,06,840 छात्राओं और वर्ष 2025-26 में अब तक 1,80,000 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है।
  • क्षेत्रीय प्रशासन में आरक्षण के अनुरूप महिलाओं की भागीदारी 
  • क्षेत्रीय प्रशासन यथा पुलिस थाना, प्रखंडों, अनुमंडल एवं जिलास्तरीय कार्यालयों में आरक्षण के अनुरूप महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जायेगी।
वर्तमान स्थिति
41 विभागों में कुल 1,11,254 पदों के विरुद्ध कुल कार्यरत पदाधिकारियों की संख्या 99,997 में से महिला पदाधिकारियों की कुल संख्या 19,925 है। 
निश्चय 3 : हर खेत तक सिंचाई का पानी

हर संभव माध्यम से हर खेत तक सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्तमान स्थिति
इस योजना अंतर्गत सर्वेक्षण के दौरान लक्ष्य के अनुसार जल संसाधन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा कुल 29,178 योजना अंतर्गत 7,39,518 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जाना है, जिसकी विभागवार विवरणी निम्नवत है-
जल संसाधन विभाग द्वारा फील्ड चैनल का पुनर्स्थापन/निर्माण, नहरों का पुनर्स्थापन, नहरों का विस्तारीकरण एवं वीयर/चेकडैम निर्माण की योजनाओं के माध्यम से कुल लक्ष्य के अनुसार 604 योजनाओं के अंतर्गत 1,19,063 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जाना है। अब तक 597 योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कर 1,18,578 हे० (99.59ः) भूमि को सिंचित कर लिया गया है। 
लघु जल संसाधन विभाग द्वारा सतही सिंचाई/नलकूप योजना के अंतर्गत कुल लक्ष्य के अनुसार 25,790 योजनाओं के अंतर्गत 5,44,788 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जाना है। अब तक 36,856 योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कर 3,71,809.6 हेक्टेयर (68.20ः) भूमि को सिंचित कर लिया गया है।  
‘मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना’ के अंतर्गत कुल 35,000 नलकूप लगाये जाने हैं, जिनमें 18,666 को हर खेत सिंचाई अंतर्गत संयुक्त सर्वेक्षित स्थलों पर तथा शेष को ओपन पोर्टल से लगाया जाना है।
कृषि विभाग द्वारा क्रियान्वितः-
विभाग द्वारा पक्का चेक डैम (30 फीट तक) एवं अन्य वैकल्पिक संरचना के माध्यम से कुल लक्ष्य के अनुसार 1,853 योजनाओं के अंतर्गत 26,902 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जाना है। अब तक 1,799 योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कर 26,361 हे० (97.98ः) भूमि को सिंचित कर लिया गया है। 
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित :-
विभाग द्वारा कुल लक्ष्य के अनुसार 832 योजनाओं के अंतर्गत 46,431 हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जाना है। अब तक 759 योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कर 43,372 हे०          (93.40ः) भूमि को सिंचित कर लिया गया है। 
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग 
मूल सर्वेक्षण में चयनित योजनाओं में कुल 99 अदद योजनाएँ (2,334 हेक्टेयर) जो वन क्षेत्र में है, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को हस्तांतरित की गयी है, जिनका क्रियान्वयन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा किया जाना है। अब तक 94 योजनाओं में कार्य प्रारंभ है, जिसमें से 88 योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य पूर्ण कर 2,112 हेक्टेयर         (90.48ः) भूमि को सिंचित कर लिया गया है।  
ऊर्जा विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कृषि विद्युत् सम्बन्ध योजना (फेज-प्प्) के तहत विद्युत् संपर्कता प्रदान करने हेतु आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। कुल लक्ष्य 4.80 लाख के विरुद्ध अब तक 3.88 लाख विद्युत संबंध प्रदान किए गए हैं। पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (त्क्ै) के तहत कुल 1ए413 कृषि फीडर के विरुद्ध 1ए408 कृषि फीडर का पृथक्करण किया गया है तथा शेष 05 कृषि फीडर का निर्माण प्रगतिधीन है।  
निश्चय 4 : स्वच्छ गाँव-समृद्ध गाँव
  • सभी गांवों में सोलर स्ट्रीट लाईट
  • सभी गांवों में सोलर स्ट्रीट लाईट लगाया जाएगा। साथ ही इसके नियमित अनुरक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। 
वर्तमान स्थिति
कुल लक्षित 8,053 ग्राम पंचायतों के 1,09,321 वार्डों में 11,73,740 सोलर स्ट्रीट लाइट के अधिष्ठापन के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 9,48,398 सोलर स्ट्रीट लाईट का अधिष्ठापन हो चुका है।
  • ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • गांवों में भी ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन एवं मल प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। वार्ड स्तर पर नालों एवं गलियों की सफाई कराई जाएगी। प्रत्येक घर से ठोस कचरे का संग्रहण किया जायेगा तथा उनका उपयुक्त तकनीक के माध्यम से निस्तारण किया जाएगा। नालों के अंत में निकले हुए गंदे जल का उपयुक्त तकनीक के माध्यम से ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जायेगी।
वर्तमान स्थिति
वर्ष 2023-24 तक लक्षित 8,053 ग्राम पंचायतों एवं 1,09,321 वार्डों के विरूद्ध 8,045 पंचायतों के 1,09,005 वार्डों में योजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है।  
  • पूर्व की निश्चय योजनाओं का अनुरक्षण
  • इसके अंतर्गत 7 निश्चय के तहत पूर्व से निर्मित योजनाओं यथा हर घर नल का जल, घर तक पक्की गली-नालियां एवं हर घर शौचालय आदि की योजनाओं का पूरा रख-रखाव किया जाएगा। 
वर्तमान स्थिति
हर घर नल का जल का अनुरक्षण के तहत 
पंचायती राज विभाग के नियंत्रणाधीन ग्रामीण वार्डों में क्रियान्वित जलापूर्ति योजनाओं के सतत संचालन एवं रख-रखाव हेतु लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को हस्तांतरित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके आलोक में अब तक पंचायती राज विभाग के नियंत्रणाधीन सभी योजनाओं का हस्तांतरण किया जा चुका है। हस्तांतरित योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव एवं अनुरक्षण का कार्य लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा संशोधित एवं समन्वित नीति के अनुरूप कराया जा रहा है।
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा क्रियान्वित जलापूर्ति योजनाओं के अनुरक्षण योजना पूर्ण होने के 5 वर्षों तक संबंधित संवेदक के द्वारा किए जाने की व्यवस्था है। तदनुसार अनुरक्षण का कार्य कराया जा रहा है।
विभाग के तहत लक्षित 4,095 ग्राम पंचायतों में से अब तक 3,932 पंचायतों में तीन सदस्यीय  (1 प्लम्बर एवं 02 हेल्पर) मरम्मती दल गठित। शेष पंचायत बहुग्रामीय योजना से आच्छादित हैं, जिनमें केंद्रीकृत मरम्मती की व्यवस्था की गयी है।
‘जीरो ऑफिस डे‘ के राज्यव्यापी अभियान के तहत कुल 22 योजनाएं अक्रियाशील पाई गईं। मरम्मती दल द्वारा विभिन्न प्रकार के 35,057 मरम्मती कार्य कराये गए हैं। 
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा पेयजल उपयोग शुल्क नीति, 2021 एवं योजना के संचालन, रख-रखाव एवं अनुरक्षण हेतु अनुदेश अधिसूचित किया गया है, जिसमें संवेदकों द्वारा 5 वर्षीय रख-रखाव की अवधि समाप्त हो जाने के बाद नल-जल योजना के रख-रखाव की अन्य व्यवस्था का दायित्व शहरी स्थानीय निकाय को दिया गया है।
उपभोक्ता शुल्क के रूप में अब तक 750.80 लाख रु० संग्रहित किये गये हैं।
घर तक पक्की गली-नालियां का अनुरक्षण
पंचायती राज विभाग द्वारा निर्धारित दीर्घकालीन अनुरक्षण नीति के अनुसार योजना के रख-रखाव एवं अनुरक्षण का दायित्व ग्राम पंचायतों को दिया गया है, जो आवश्यकतानुसार वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के माध्यम से इन योजनाओं का अनुरक्षण करेगी।
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा “घर तक पक्की गली-नालियां” के अनुरक्षण नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। 
हर घर शौचालय का अनुरक्षण 
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान द्वितीय चरण अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालयों में तकनीकी त्रुटि अथवा के समाधान के उद्देश्य से आवश्यक IEC (Information, Education and Communication) कार्यकलापों को अपनाकर परिवारों को शौचालयों की मरम्मत करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही अक्रियाशील वैयक्तिक शौचालय/सामुदायिक स्वच्छता परिसरों को क्रियाशील बनाए जाने हेतु की जा रही कार्रवाई का अनुश्रवण किया जा रहा है। ैठड.ळ पोर्टल पर प्रतिवेदित कुल 3.23 लाख सिंगल पिट शौचालयों में से 1,95,002 शौचालयों की मरम्मति कर डबल पिट में परिवर्तित किया गया है।
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि हर घर शौचालय निर्माण योजना व्यक्तिगत लाभार्थी योजना थी, जिसमें अनुरक्षण की आवश्यकता नहीं है।
  • पशु एवं मत्स्य संसाधनों का विकास 
  • आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर दुग्ध उत्पादन एवं प्रसंस्करण, मुर्गी पालन, मछली पालन आदि को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य में स्थित चौर क्षेत्रों का विकास बड़े पैमाने पर किया जाएगा। साथ ही अन्य क्षेत्रों में तालाबों, पोखरों एवं बड़े जलाशयों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रसार किया जाएगा तथा मछली पालन की पूरी उत्पादन श्रृंखला पर काम किया जाएगा। मछली के उत्पादन को इतना बढ़ाया जाएगा कि बिहार की मछली अन्य राज्यों में जाएगी। इनसे राज्य के पशुपालकों एवं मछली पालकों की आय बढ़ेगी। 
वर्तमान स्थिति
मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2022-25 में कुल 2,200 हेक्टेयर में तालाब निर्माण के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक कुल 1,839.95 हेक्टेयर में तालाब का निर्माण कराया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 600 हेक्टेयर में तालाब निर्माण के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 148.70 हेक्टेयर में तालाब निर्माण किया गया है।
समग्र अलंकारी मात्स्यिकी योजना अंतर्गत 159 इकाई में अधिष्ठापन लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 118 इकाई का अधिष्ठापन किया गया है।
खुली जलस्रोत में पेन/RFF (Riverine Fish Farming) से मछली पालन योजना अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 100 इकाई के विरुद्ध अब तक 46 इकाई का अधिष्ठापन किया गया है।
बायोफ्लॉक एवं Recirculatory Aquaculture System तकनीक से मत्स्य पालन की योजना अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 138 इकाई के विरुद्ध अब तक 110 इकाई का अधिष्ठापन किया गया है।
गंगा नदी तंत्र में नदी पुनर्स्थापन (रिवर रैंचिंग) कार्यक्रम की योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में पुनर्स्थापन हेतु लक्षित 122 लाख अंगुलिकाओं के विरुद्ध कुल 129.29 लाख तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 में लक्षित 118 लाख अंगुलिकाओं के विरुद्ध 121.86 लाख की उपलब्धि हासिल हुई है। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2024-25 तक लक्षित 240 लाख अंगुलिकाओं के विरुद्ध 251.15 लाख उपलब्धि हासिल हुई है।
निजी तालाब का जीर्णोद्धार एवं विकास की योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2022-25 में 450 हेक्टेयर में तालाब के जीर्णोद्धार एवं विकास के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 335.45 हेक्टेयर में कार्य किया गया है। 
गव्य प्रक्षेत्र के अंतर्गत 7,000 नई दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों का गठन करने के कुल लक्ष्य के विरुद्ध 6,189 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है। सुधा डेयरी विपणन तंत्र विस्तार अंतर्गत 600 होल डे मिल्क बूथ की स्थापना के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 490 स्थलों पर बूथ निर्माण पूर्ण किया गया है तथा 110 अन्य स्थलों हेतु कार्यादेश निर्गत किया गया है।
पशु संसाधनों का विकास अंतर्गत बकरी फार्म की स्थापना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में लक्षित 137 के विरुद्ध 129 तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 में लक्षित 137 के विरुद्ध 115 लाभुक आच्छादित। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लक्षित 130 के विरुद्ध 93 लाभुक आच्छादित। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक कुल 404 बकरी फार्म की स्थापना के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक कुल 337 लाभुक आच्छादित हुए हैं। 
लेयर मुर्गी फार्म की स्थापना पर अनुदान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में लक्षित 77 मुर्गी फार्म हेतु 50 लाभुक तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 100 मुर्गी फार्म हेतु 77 लाभुक आच्छादित। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 100 लेयर मुर्गी फार्म हेतु 64 लाभुक आच्छादित। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक कुल 277 लेयर मुर्गी फार्म की स्थापना के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक कुल 191 लाभुक आच्छादित हुए हैं। 
निश्चय 5 :स्वच्छ शहर-विकसित शहर
  • ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  • बिहार के सभी शहरों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था उपयुक्त तकनीक के माध्यम से की जायेगी।
वर्तमान स्थिति
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत 5,482 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं 4,103 शहरी वार्डों में ठोस अपशिष्ट का पृथक्कीकरण तथा कुल अपशिष्ट प्राप्ति 7,004 टन प्रतिदिन में से 2,285 टन प्रतिदिन (33 प्रतिशत) का प्रसंस्करण किया जा रहा है। इस हेतु 43 नगर निकायों में MRF (Material Recovery Facility) तथा 111 नगर निकायों में Waste to Compost केंद्र संचालित हैं एवं शेष नगर निकायों में Waste to Compost Plant के निर्माण हेतु निकाय स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत हाउस सर्विस कनेक्शन से संबंधित कुल 10 योजनाएं प्रस्तावित की गयी हैं, जिसमें से 8 योजनाएं कार्यान्वित हैं। इन 8 योजनाओं के अन्तर्गत कुल 1,35,076 हाउस सर्विस कनेक्शन दिया जाना है जिसमें से 1,01,089 कनेक्शन देने का कार्य पूरा कर लिया गया है।
  • वृद्धजनों हेतु आश्रय स्थल
  • इसके अंतर्गत वृद्धजनों के लिये सभी शहरों में आश्रय स्थल बनाया जाएगा तथा इनके बेहतर प्रबंधन एवं संचालन की व्यवस्था की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
योजना का कार्यान्वयन जिला मुख्यालय में शीघ्र प्रारंभ कराये जाने का निदेश निर्गत किया गया है। योजना के संचालन हेतु राज्य के 37 जिला मुख्यालयों (पटना को छोड़कर) में अवस्थित नगर निकायों को एक यूनिट (50 बेड) के संचालन हेतु वित्तीय वर्ष 2023-24 में 19 करोड़ 68 लाख रु० के आवंटन की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
आश्रय स्थलों में जीविका के माध्यम से भोजन का प्रबंध करने हेतु मंत्रीपरिषद् की स्वीकृति प्राप्त। अब तक 31 नगर निकायों द्वारा भोजन के प्रबंध हेतु जीविका के साथ डवन् किया गया है।
33 आश्रय स्थलों का संचालन प्रारंभ हो गया है, जिसमें 45 महिला एवं 34 पुरुष आवासित हैं।
  • शहरी गरीबों हेतु बहुमंजिला आवासन
  • इसके अंतर्गत शहर में रह रहे बेघर/भूमिहीन गरीब लोगों को बहुमंजिला भवन बनाकर आवासन उपलब्ध कराया जायेगा।
वर्तमान स्थिति
मलिन बस्तियों के निवासियों हेतु बहुमंजिला भवन का निर्माण योजना के प्रथम चरण के अन्तर्गत 07 शहरों (पटना, गया, समस्तीपुर, भागलपुर, डालमियानगर, सासाराम एवं मुजफ्फरपुर) में हाउसिंग बोर्ड की भूमि पर लोक निजी भागीदारी के तहत बहुमंजिला भवन का निर्माण कराने का प्रस्ताव है।
प्रथम चरण में पटना नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत 750 परिवारों हेतु बिहार राज्य आवास बोर्ड की भूमि पर लोक निजी भागीदारी के द्वारा बहुमंजिला आवासों का निर्माण कराये जाने की सैद्धांतिक सहमति मंत्रिपरिषद से प्राप्त। कार्रवाई प्रक्रियाधीन।
राज्य के सभी जिलों में सरकारी भूमि अथवा बिहार राज्य आवास बोर्ड की भूमि पर चरणबद्ध रूप से शहरी गरीबों हेतु बहुमंजिला आवासों का निर्माण कराया जायेगा।
इस योजना को 7निश्चय-3 के अंतर्गत ’शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास की व्यवस्था करने‘ से संबंधित योजना से आच्छादित किये जाने का निर्णय विभाग द्वारा प्रतिवेदित किया गया है।
  • सभी शहरों एवं महत्वपूर्ण नदी घाटों पर विद्युत शवदाह गृह सहित मोक्षधाम का निर्माण
  • सभी शहरों एवं महत्वपूर्ण नदी घाटों पर विद्युत शवदाह गृहों सहित मोक्षधाम का निर्माण कराया जाएगा, जिससे लोगों को वहाँ पर दाह संस्कार हेतु जरूरी सुविधाएँ मिल सकें।
वर्तमान स्थिति
पूर्व से निर्मित 8 विद्युत शवदाह गृह (पटना में 3 तथा वैशाली, मुंगेर, भागलपुर, मोकामा एवं सोनपुर में 1-1) के अतिरिक्त लक्षित सभी 41 योजनाओं में कार्य प्रारंभ, जिसमें 11 योजनाओं में कार्य पूर्ण है।
  • सभी शहरों में स्ट्रॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जायेगा जिससे कि जल जमाव की कोई समस्या न हो।
वर्तमान स्थिति
निश्चय-2 एवं अन्य योजनाओं के अंतर्गत अब तक स्वीकृत 38 योजनाओं में से 32 योजनाओं में कार्य प्रारंभ, 04 योजनाओं में कार्य पूर्ण एवं 06 योजनाओं में कार्य प्रारंभ किया जाना शेष है।
निश्चय 6 :सुलभ सम्पर्कता
  • ग्रामीण पथों की संपर्कता
  • आस-पास के गांवों को जोड़ते हुए मुख्य पथों एवं महत्वपूर्ण स्थानों (प्रखंड/थाना/अनुमंडल) अथवा महत्वपूर्ण सुविधाओं यथा बाजार, अस्पताल, राज्य उच्च पथ एवं राष्ट्रीय उच्च पथों तक सम्पर्कता हेतु नई सड़कों का निर्माण कराया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
विभाग द्वारा सुलभ संपर्कता योजना के तहत चयनित 73 योजनाओं की स्थिति निम्नवत है-
14 योजनाओं में कार्य प्रारंभ,
22 योजनाओं की निविदा प्रक्रियाधीन,
02 योजनाओं की निविदा पूर्ण,
01 योजना का कार्यादेश रद्द एवं 01 योजना स्थगित किया जाना है,
20 योजनाओं का स्व्। ;स्मजजमत वि ।बबमचजंदबमद्ध निर्गत,
13 योजना विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन
विभाग द्वारा सुलभ संपर्कता योजना की मार्गदर्शिका निर्गत की गई है।
  • शहरी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार बाईपास अथवा फ्लाईओवर का निर्माण
  • शहरी क्षेत्रों में जाम की समस्या से मुक्ति एवं सुचारू यातायात के संचालन हेतु आवश्यकतानुसार बाईपास अथवा फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
सुलभ सम्पर्कता के अंतर्गत बाईपास अथवा फ्लाईओवर के निर्माण की अद्यतन स्थिति निम्नवत है-
वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक स्वीकृत 24 योजनाओं में से 17 योजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण, 06 योजनाओं में कार्य प्रगति पर तथा 01 योजना प्रक्रियाधीन है।
वर्ष 2024-25 के अंतर्गत 19 योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिसमें 01 योजना पूर्ण, 11 योजनाओं में कार्य प्रगति पर तथा 07 योजनाएं विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन हैं।
वर्ष 2025-26 के अंतर्गत स्वीकृत 06 योजनाओं में से 01 योजना में कार्य प्रगति पर एवं 05 योजना प्रक्रियाधीन हैं।
निश्चय 7:सबके लिये अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा
  • बेहतर पशु स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु आधारभूत व्यवस्थाएँ :
  • कॉल सेन्टर एवं मोबाइल एप की मदद से डोर स्टेप सेवा की व्यवस्था
  • प्रत्येक 8-10 पंचायतों पर पशु अस्पताल की व्यवस्था की जाएगी। पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, कृमिनाशन जैसी सेवाओं की डोर स्टेप डिलिवरी कराने की ठोस व्यवस्था की जाएगी। लोग कॉल सेन्टर में फोन कर अथवा मोबाईल ऐप के माध्यम से इन सुविधाओं को प्राप्त कर सकेंगे। टेलीमेडिसिन के माध्यम से भी पशु अस्पताल जुड़े रहेंगे जिनसे चिकित्सा परामर्श दिया जा सकेगा और आवश्यतानुसार मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से पशु चिकित्सक एवं अन्य कर्मियों के द्वारा लोगों के घरों में पहुँचकर पशु चिकित्सा एवं अन्य सेवाएँ दी जाएगी। पशुओं की सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएँ निःशुल्क रहेंगी।
 टेलीमेडिसिन के माध्यम से चिकित्सा परामर्श की व्यवस्था के तहत कुल 1,47,721 चिकित्सा परामर्श प्रदान किया गया है।
 534 मोबाईल यूनिट्स के माध्यम से पशु चिकित्सा एवं अन्य सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था के तहत कुल 31,15,590 पशुओं को चिकित्सा सुविधा प्रदान की गयी है।
  • देशी गोवंश के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत गोवंश विकास संस्थान की स्थापना की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
गोवंश विकास संस्थान की स्थापना के सम्बन्ध में दिनांक 16.04.2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में विमर्शित।
  • (पप) गांव-गांव तक लोगों के लिये स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता :
  • स्वास्थ्य उपकेन्द्रों को नियमित एवं बेहतर रूप से संचालित कर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जाएंगी तथा टेलीमेडिसिन के माध्यम से इन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र,अनुमण्डल अस्पताल एवं जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा और लोगों को चिकित्सीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप तथा मोतियाबिंद आदि बीमारियों हेतु स्क्रीनिंग की जाएगी एवं गंभीर बीमारी के मामलों को रेफर किया जाएगा। इसके साथ ही पैथोलॉजिकल जांच हेतु सैम्पल एकत्र कर उनकी जाँच की भी व्यवस्था की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
कुल स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या 11,272 है, जिसमें से 6,667 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध है। टेलीमेडिसिन सुविधा से अब तक कुल 2 करोड़ 78 लाख 10 हजार 549 मरीजों को परामर्श दिया गया है।
सभी स्वास्थ्य संस्थानों (स्वास्थ्य उपकेंद्रों सहित) में माह दिसम्बर, 2025 में कुल 21,09,752 पैथोलॉजिकल जांच की गयी हैं।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, अनुमण्डल अस्पताल एवं जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं को और बेहतर एवं विस्तारित किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
32 जिला अस्पतालों एवं 6 मेडिकल कॉलेज सहित सभी जिलों में डायलिसिस इकाई स्थापित एवं संचालित हैं। 8 चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में एम०आर०आई० सुविधा उपलब्ध है। मधेपुरा में मशीन का अधिष्ठापन कार्य प्रगति में एवं बेतिया में पुनर्निविदा प्रक्रियाधीन है।
  • हृदय में छेद के साथ जन्मे बच्चों के निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की जाएगी तथा इसके लिए नई योजना ‘बाल हृदय योजना’ लागू की जाएगी। योजना के तहत बाल हृदय रोगी तथा उनके एक परिचर के लिए परिवहन भाड़े के रूप में भी रू० 10,000 तक प्रति व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति
हृदय में छेद के साथ जन्मे 1,732 बच्चों का इलाज प्रशान्ति फाउंडेशन के सहयोग से गुजरात के अहमदाबाद में अवस्थित सत्यसाईं अस्पताल में कराया गया है। इसके अलावा इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में 190 बच्चों, इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में 468 बच्चों तथा जय प्रभा मेदान्ता में 369 बच्चों का इलाज कराया गया है। इस प्रकार बाल हृदय योजना के तहत अब तक कुल 2,759 बच्चों का इलाज कराया गया है।
2. इसके अतिरिक्त निम्नलिखित कार्यक्रमों को भी लागू करने का निर्णय लिया गया :-
  • (क) विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने जाने वाले विद्यार्थियों के लिए डिजिटल काउन्सलिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने जाने वाले विद्यार्थियों के लिए डिजिटल काउन्सिलिंग सेन्टर की स्थापना एवं क्रियान्वयन पर कार्य करने में शिक्षा विभाग द्वारा असमर्थता व्यक्त की गयी है।
  • (ख) दलहन के उत्पादन को बढ़ाने हेतु केन्द्र सरकार के सहयोग से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर दलहन की खरीद की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
सात निश्चय-2 के तहत रबी विपणन मौसम ( RMS) 2025-26 के अंतर्गत दलहन की अधिप्राप्ति अवधि पैक्स/व्यापार मंडल के माध्यम से दिनांक 25-06-2025 से दिनांक 15-07-2025 तक निर्धारित की गई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MS), बाजार मूल्य से कम रहने के कारण अधिप्राप्ति नगण्य रही।
  • (ग) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए निर्मित एकीकृत पोर्टल e-shram[](https://eshram.gov.in) पर अब तक कुल 3,22,67,742 पंजीकृत कामगारों का डाटा अपलोड किया जा चुका है।
  • श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा राज्य के बाहर काम करने वाले कामगारों के पंचायतवार डाटा बेस के संधारण का कार्य “बिहार प्रवासी कामगार ऐप’’ के माध्यम से प्रारंभ कर दिया गया है।