7 निश्चय के तहत बिहार में युवाओं के लिए कई कार्यक्रम चलाए गए हैं। उच्च शिक्षा के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, युवाओं को रोजगार ढूंढने में मदद करने हेतु स्वयं सहायता भत्ता योजना, युवाओं को कम्प्यूटर, संवाद कौशल एवं व्यवहार कौशल का प्रशिक्षण देने हेतु कुशल युवा जैसे कार्यक्रमों को चलाया गया है। इन सभी कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखा जाएगा। अब इनके साथ-साथ बिहार के युवाओं को और बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें। साथ ही बिहार में उद्यमिता को और बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कि युवा स्वयं उद्यमी बन सकें और अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकें।
इसके तहत निम्न योजनाओं/कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा हैः-
- संस्थानों में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना
- पिछले पाँच वर्षों में जिला एवं अनुमण्डल स्तर पर कई संस्थानों का निर्माण कराया गया है। इसी को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य के प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय सेंटर ऑफ एक्सेलेंस बनाया जा रहा है।
- इनमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) एवं पॉलिटेक्निक में पढ़ रहे बच्चों को वर्तमान उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप उच्चस्तरीय एवं नई तकनीक वाले क्षेत्रों में, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है यथा सोलर, ड्रोन तकनीक, ऑप्टिकल फाइबर एवं नेटवर्किंग, ट्रांसफॉर्मर मैनुफैक्चरिंग एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी इत्यादि जैसे कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाना है। इन संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त छात्रों की बाजार में मांग रहेगी तथा इन्हें बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
वर्तमान स्थिति
राज्य के प्रत्येक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना-
राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सेन्टर ऑफ एक्सेलेंस स्थापित करने हेतु टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ एकरारनामा किया गया है। सेन्टर ऑफ एक्सेलेंस की स्थापना हेतु कुल 149 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में से प्रथम चरण में 60 तथा द्वितीय चरण में 89 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का चयन किया गया है।
वर्तमान में प्रशिक्षण हेतु कुल 23 पाठ्यक्रमों का चयन किया गया है तथा प्रशिक्षण पूर्ण करने के पश्चात प्रशिक्षित छात्रों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु 20 औद्योगिक भागीदार (Industry
Partner) चिह्नित किये गये हैं।
प्रथम चरण में प्रशिक्षण हेतु चयनित कुल 60 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण प्रारम्भ किया गया, जिसमें अब तक कुल 7,865 छात्र/छात्राओं का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है।
वर्तमान में 4ए539 छात्र/छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कुल प्रशिक्षित छात्र/छात्राओं में से 5,570 को रोजगार उपलब्ध करा दिया गया है।
द्वितीय चरण के 89 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इनमें 89 में भवन निर्माण हेतु एजेंसी को कार्य आवंटित, जिसमें से 79 में कार्य पूर्ण एवं शेष में कार्य प्रगति पर है।
राज्य के प्रत्येक पॉलिटेक्निक संस्थान में गुणवत्ता बढ़ाने की योजना -
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना को नॉलेज पॉर्टनर सहित कार्यान्वयन एजेंसी मनोनीत किया गया है।
44 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में से 11 को हब (बड़े और भारी मशीनों से संबंधित) तथा 33 को स्पोक (छोटे मशीनों से संबंधित) संस्थान के रूप में चयनित किया गया है।
उद्योग भागीदार के रूप में 5 उद्योग पार्टनर्स के साथ डवन् हस्ताक्षरित किया गया है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शैक्षणिक सत्र 2020-2023, 2021-2024 एवं 2022-2025 में क्रमशः 7289, 8899 एवं 10,522 छात्र/छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। गत् 4 वर्षों में (2022-2023, 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 में माह दिसम्बर, 2025 तक) कुल 16,891 छात्र/छात्राओं का नियोजन किया गया है ।
- हर जिले में मेगा-स्किल सेन्टर (मार्गदर्शन, नयी स्किल में प्रशिक्षण)
- वैसे युवा जो आई0टी0आई0 एवं पॉलिटेक्निक में नहीं पढ़ रहे हैं और नए कौशल का प्रशिक्षण पाना चाहते हैं, उनके लिए हर जिले में कम से कम एक मेगा स्किल सेंटर खोलने हेतु कार्रवाई की जानी है। यहाँ पर लोकप्रिय एवं उपयोगी स्किल्स यथा अपैरल मेकिंग, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडिशनिंग, सोलर पैनल मैकेनिक, ब्यूटी एवं वेलनेस ट्रेनिंग, बुजुर्गोंं एवं मरीजों की देखभाल के लिए केयर गीभर जैसे क्षेत्रों में अल्प अवधि का रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाना है, जिनकी बाजार में मांग रहती है।
वर्तमान स्थिति
राज्य के सभी 38 जिलों में हब एवं स्पोक मॉडल के आधार पर मेगा स्किल सेंटर की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है।
प्रथम चरण में 9 प्रमंडलीय जिलों में वित्तीय वर्ष 2025-26 से आगामी 5 वर्षों में योजना के कार्यान्वयन हेतु कुल 280.87 करोड़ रुपये की लागत से स्थापना हेतु प्रस्ताव मंत्रिपरिषद से स्वीकृत किया गया है।
प्रथम चरण में सभी 9 प्रमंडलों में मेगा स्किल सेंटर में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रकाशित की गयी है।
- हर प्रमण्डल में टूल रूम
- प्रत्येक प्रमण्डल में टूल रूम एवं ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जाना है। टूल रूम में कई क्षेत्रों के नवीन एवं अत्याधुनिक मशीनें एक स्थान पर उपलब्ध रहेंगी। इनमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई०टी०आई०) एवं पॉलिटेक्निक से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को अत्याधुनिक मशीनों पर नई तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। 10वीं एवं 12वीं पास युवकों के लिए भी इनमें दीर्घकालीन प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। इनसे प्रशिक्षण पाने के पश्चात् युवाओं को उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में रोजगार मिलने में सहूलियत होगी।
वर्तमान स्थिति
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा “हर प्रमंडल में टूल रूम योजना” को उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है।
- स्किल एवं उद्यमिता हेतु नए विभाग का गठन (आई0टी0आई0/पॉलीटेक्निक सहित)
- स्किल डेवलपमेंट तथा उद्यमिता पर विशेष बल देने हेतु एक अलग विभाग स्किल डेवलपमेंट एवं उद्यमिता विभाग का गठन किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई0टी0आई0)ए पॉलिटेक्निक को समाहित किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग गठित।
- हिन्दी में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास
- केन्द्र सरकार की योजना के तहत तकनीकी शिक्षा हिन्दी में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
पॉलिटेक्निक संस्थानों में हिन्दी में तकनीकी शिक्षा का पठन-पाठन कराया जा रहा है एवं परीक्षा भी हिंदी में देने का विकल्प उपलब्ध है।
अभियंत्रण महाविद्यालयों में भी ।प्ब्ज्म् के सहयोग से हिंदी भाषा में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करा दी गयी हैं तथा हिन्दी भाषा में भी पठन-पाठन एवं परीक्षा देने का विकल्प उपलब्ध है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में हिंदी में पठन-पाठन प्रारम्भ कर दिया गया है।
शैक्षणिक सत्र 2024-25 से मेडिकल संस्थानों में हिंदी भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
- चिकित्सा, अभियंत्रण एवं खेल विश्वविद्यालय की स्थापना
- बिहार में चिकित्सा शिक्षा एवं अभियंत्रण शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं एक अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। साथ ही बिहार में खेलकूद को बढ़ावा देने हेतु अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एवं स्पोर्ट्स एकेडमी, राजगीर के परिसर में एक खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
वर्तमान स्थिति
चिकित्सा विश्वविद्यालय
बिहार में चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है।
विश्वविद्यालय के संचालन हेतु कुल 32 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गयी है, जिनमें से 6 पदों (कुलपति, कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, उच्च वर्गीय लिपिक एवं निम्न वर्गीय लिपिक) पर नियुक्ति की जा चुकी है। स्टेनो, डाटा इन्ट्री ऑपरेटर एवं आई0टी0 ब्यॉय की सेवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से ली जा रही है।
बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुशल कार्य संचालन हेतु 128 पदाधिकारियोंध् कर्मियों के पद सृजन की कार्रवाई की जा रही है।
वर्तमान में इसका संचालन आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के परिसर में किया जा रहा है।
बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का परिनियम (ैजंजनजमे) सीनेट द्वारा अनुमोदित, सरकार स्तर से अनुमति प्राप्त किया जा चुका है।
राज्य के सभी सरकारी/निजी चिकित्सा महाविद्यालयों एवं सभी स्वास्थ्य संस्थानों को बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना से संबद्ध कर दिया गया है।
वर्तमान में बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, मीठापुर, पटना का भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है।
अभियंत्रण विश्वविद्यालय
बिहार में अभियंत्रण शिक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है।
विश्वविद्यालय के संचालन हेतु तत्काल आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में छठे तल को आवंटित किया गया है। विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के रूप में बस स्टैंड मीठापुर में कुल 5 एकड़ भूमि शिक्षा विभाग, बिहार द्वारा आवंटित की गई है। विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
विश्वविद्यालय के सफल संचालन हेतु कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक तथा वित्त पदाधिकारी सहित कुल 17 पदों पर नियुक्ति की गयी है।
खेल विश्वविद्यालय की स्थापना
राजगीर में निर्माणाधीन राज्य खेल अकादमी-सह-अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की अवसंरचनाओं में खेल विश्वविद्यालय का संचालन किया जा रहा है।
खेल विश्वविद्यालय के संचालन हेतु कुल 275 पदों का सृजन किया गया है, जिसमें कुलपति, रजिस्ट्रार एवं परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति की गयी है। शेष नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं।
बिहार खेल विश्वविद्यालय का लोकार्पण 29.08.2024 को किया जा चुका है।
बिहार खेल विश्वविद्यालय के संचालन हेतु प्रथम सामान्य परिषद्, प्रथम कार्य परिषद् तथा प्रथम एकेडमी एवं एक्टिविटी परिषद् का गठन किया जा चुका है।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में खेल प्रशिक्षण के स्नातकोत्तर डिप्लोमा (एथलेटिक्स-20 सीट एवं क्रिकेट-20 सीट) की पढाई आरम्भ की जा चुकी है।
बिहार खेल विश्वविद्यालय देश में सरकारी खेल विश्वविद्यालयों की रैकिंग में चौथे स्थान पर है।
- उद्यमिता विकास हेतु अनुदान/प्रोत्साहन
- युवाओं के लिए न सिर्फ उच्च स्तर के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है बल्कि उनको अपना उद्यम/व्यवसाय लगाने के लिए सरकार ने मदद करने का निर्णय लिया है। नया उद्यम अथवा व्यवसाय के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा तथा अधिकतम 5 लाख का ऋण मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर दिया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
मुख्यमंत्री अनुसूचितजाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी योजना वर्ष 2018 से लागू है।
इस योजना में वर्ष 2020 से अति पिछड़े वर्ग को शामिल करते हुए मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना प्रारंभ की गयी।
इन योजनाओं में उद्यमियों को 10 लाख रूपये तक की सहायता दी जाती है जिसमें 5 लाख रूपये का अनुदान एवं 5 लाख रूपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है।
वर्ष 2021 में ही सात निश्चय-2 के तहत अन्य वर्गों (सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग) के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना शुरू की गयी जिसमें 5 लाख रूपये का अनुदान एवं 1 प्रतिशत ब्याज पर 5 लाख रूपये का ऋण दिया जाता है।
उक्त योजनाओं के अतिरिक्त वर्ष 2023 में राज्य के अल्पसंख्यक वर्ग के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना की स्वीकृति दी गयी है।
मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/जनजाति उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 11,441 के विरुद्ध 11,024 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 9,121 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 283.50 करोड़ रु०, 6,677 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 270.27 करोड़ रु० एवं 3,896 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 76.54 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 630.21 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 12,129 के विरुद्ध 10,524 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 8,487 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 267.62 करोड़ रु०, 6,525 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 264.76 करोड़ रु० एवं 3,949 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 77.05 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 609.43 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2021-22 से अब तक लक्षित 11,991 के विरुद्ध 10,982 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 8,743 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 274.69 करोड़ रु०, 6,473 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 262.47 करोड़ रु० एवं 3,868 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 75.19 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 612.35 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना अन्तर्गत वर्ष 2023-24 से अब तक लक्षित 2,860 के विरुद्ध 2,685 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 2,087 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 37.98 करोड़ रु०, 1,184 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 50.67 करोड़ रु० एवं 510 लाभार्थियों को तृतीय किस्त के रूप में 9.78 करोड़ रु० (तीनों क़िस्त मिलाकर कुल 98.43 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
बिहार लघु उद्यमी योजना :- वर्ष 2023-24 से अब तक लक्षित 1,09,901 के विरुद्ध 96,350 आवेदकों का चयन किया गया है। इनमें से 71,740 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 358.67 करोड़ रु० एवं 22,841 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 228.41 करोड़ रु० (दोनों क़िस्त मिलाकर कुल 587.08 करोड़ रु०) की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
सामान्य वर्ग के अंतर्गत 10,584 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 7438 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 37.18 करोड़ रुपये एवं 2495 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 24.95 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 62.13 करोड़ रुपये है।
अनुसूचित जाति के अंतर्गत 24,227 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 17,297 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 86.48 करोड़ रुपये एवं 4910 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 49.10 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 135.58 करोड़ रुपये है।
अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत 1590 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 1115 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 5.57 करोड़ रुपये एवं 265 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 2.65 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 8.22 करोड़ रुपये है।
पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत 25,483 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 20,403 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 102.01 करोड़ रुपये एवं 6327 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 63.27 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 165.28 करोड़ रुपये है।
अति पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत 34,466 लाभार्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 25,487 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 127.43 करोड़ रुपये एवं 8844 लाभर्थियों को द्वितीय किस्त के रूप में 88.44 करोड़ रुपये अर्थात लाभार्थियों की कुल वितरित राशि 215.87 करोड़ रुपये है।
- रोजगार के 20 लाख से ज्यादा नए अवसर का सृजन
- सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्र में रोजगार के 20 लाख से ज्यादा नये अवसर सृजित करने का निर्णय लिया गया है।
वर्तमान स्थिति
रोजगार के नए अवसरों के सृजन के तहत अब तक सरकारी क्षेत्र में नियमित पदों पर 7,95,832 की नियुक्ति तथा संविदा आधारित पदों पर 1,17,784 एवं बाह्य स्रोत पर 70,525 अर्थात कुल 9,84,141 कर्मियों की नियुक्ति/नियोजन किया गया है। इसी प्रकार गैर सरकारी क्षेत्रों में अब तक कुल 44,37,729 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है।