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Foreign Section

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1. वीजा संबंधी कार्य:(Visa Related Work)

विदेशियों के वीजा से संबंधित कार्रवाइयाँ अनिवार्यतः IVFRT (Immigration Visa Foreigner Registration Tracking) Portal के माध्यम से होती हैं।

  • विदेशियों के वीजा निर्गम, नियमन, विस्तार आदि कार्रवाइयाँ अनिवार्यतः गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित IVFRT (Immigration Visa foreigners Registration Tracking) Portal पर निष्पादित होती हैं।
  • इन संदर्भो में केन्द्र सरकार द्वारा गठित अधिनियम (यथा विदेशी अधिनियम, पारपत्र अधिनियम) एवं वीजा मैनुअल तथा समय-समय पर निर्गत केन्द्र सरकार के कार्यपालक आदेश/निर्देश प्रयोज्य हैं।
  • अलग-अलग वीजा प्रकारों में विदेशियों के निबंधन, नियमन, वीजा-विस्तार आदि के शक्तियाँ एव उसकी मात्रा राज्य सरकार एवं अधीनस्थ FRO (विदेशी निबंधन अधिकारी) में प्रत्यायोजित
  • अल्पकालिक वीजा (पर्यटक वीजा, मुलाकाती वीजा) को छोड़कर शेष वीजा प्रकारों में विदेशियों को निकटतम जिलों के FRO कार्यालय में निबंधन कराने की अनिवार्यता है।
  • वीजा नियमों के उलंघन पर तद्नुरूप कार्रवाई हेतु राज्य सरकार एवं विदेशी निबंधन अधिकारी प्राधिकृत है।
  • वीजा विस्तार के लिए ऑन-लाईन अंगीकृत व्यवस्था में: - (क) पाकिस्तानी, बंगलादेशी एवं अफगानी राष्ट्रिकों के संदर्भ में प्रथमतः गृह मंत्रालय एवं बाद में राज्य सरकार एवं (ख) अन्य देश के राष्ट्रिकों के मामले में FRRO कोलकता निर्णय लेने हेतु प्राधिकृत हैं।
  • वीजा की प्राधिकृत अवधि के दरम्यान स्वदेश लौटने वाले विदेशियों को Exit Permission देने हेतु FRO प्राधिकृत है।

2. अवैध घुसपैठी के नियमन, खोज, निग्रह एवं स्वदेश प्रत्यावर्तन के संबंध में: (Regarding regulation, search, detention and repatriation of illegal infiltrators:)

वीजा नियमों के उल्लघंन, अधिकवास अथवा अवैध घुसपैठ की स्थिति में संगत अधिनियमों/नियमों निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में कार्रवाई हेतु सभी जिलो के पुलिस अधीक्षक प्राधिकृत है। स्पष्ट नागरिकता वाले विदेशियों जिनके विरूद्ध कोई मामला न्यायालय में लंबित नहीं हो तथा कोई स्थानीय आपत्ति नहीं हो उस स्थिति में उनके वीजा को विनियमित करते हुए बर्हिगमन दिये जाने की शक्ति FRRO/FRO को प्रत्यायोजित है। यदि विदेशी किसी मामले में माननीय न्यायालय में आरोपित हों तथा माननीय न्यायालय द्वारा सजा दी गयी हों उस स्थिति में सजा अवधि पूर्ण होने के बाद उनके स्वदेश प्रत्यावर्तन की कार्रवाई की शक्ति FRRO/FRO को प्रत्यायोजित है।

जिन विदेशी नागरिकों की नागरिकता स्पष्ट नहीं है उन विदेशी नागरिकों के संबंध में FRO कार्यालय से प्राप्त पूर्ण/अपूर्ण सूचना प्रतिवेदन विहित प्रपत्र में उनके नागरिकता सत्यापन हेतु राज्य सरकार के स्तर से विदेश मंत्रालय को भेजी जाती है। जिसकी सूचना गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भी दी जाती है। विदेश मंत्रालय से उनके नागरिकता संपुष्टि होने के उपरांत तथा संबंधित विदेशी नागरिक द्वारा सजा अवधि पूर्ण कर लेने के उपरांत उनके स्वदेश प्रत्यावर्तन संबंधी कार्रवाई वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक के स्तर से किया जाता है। जब संबंधित देश द्वारा अपने नागरिकों के संदर्भ में Travel Permit जारी कर दिया जाता है, तो संबंधित जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक के कार्यालय द्वारा उन विदेशी नागरिकों को बहिर्गमन संबंधी आदेश निर्गत किया जाता है। सजा अवधि पूर्ण होने तथा स्वदेश प्रत्यावर्तन की प्रतीक्षा में विदेशी नागरिकों को तब तक कारा रहित संसीमन केन्द्र में रखे जाने का निर्देश है।

केन्द्र सरकार से प्राप्त दिशानिर्देश के आलोक में भारत में अवैध अधिकवास में रह रहे विदेशी नागरिकों के खोज, निग्रह तथा उनके विरूद्ध कार्रवाई करने और स्वदेश प्रत्यावर्तन के निमित उच्चस्तरीय समीति की गठन भी की गयी है।

3. नागरिकता:( Citizenship)

वैसे विदेशी नागरिक जो भारतीय नागरिकता प्राप्ति संबंधी अहर्ता पूर्ण करते हैं, वे भारत सरकार के पोर्टल https://indiancitizenshiponline.nic.in पर आवेदन ऑन लाईन करते है तत्पश्चात् प्रिंट किये हुए आवेदन और सभी वांछित कागजात संबंधित जिला के जिला पदाधिकारी कार्यालय में समर्पित करते है। जिला पदाधिकारी के कार्यालय द्वारा जाँचोंपरांत इनके आवेदन का अग्रसारण पोर्टल के माध्यम से गृह विभाग को प्रेषित किया जाता है। इस विभाग द्वारा समीक्षा कर ऑन लाईन माध्यम से गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को उक्त विदेशी नागरिक के भारतीय नागरिकता के विचारार्थ / निर्णयार्थ भेजी जाती है।

4. विदेशों में प्रयोजनार्थ प्रमाण-पत्रों का प्रतिहस्ताक्षरण:

इस प्रशाखा द्वारा व्यक्तिगत दस्तावेजों यथा जन्म, मृत्यु, विवाह, पी.सी.सी. आदि का प्रतिहस्ताक्षरण किया जाता है। पहले दस्तावेज जारी करने वाले राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों एतदर्थ प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा प्रमाणीकरण किया जाता है। द्वितीय चरण में विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रतिहस्ताक्षरण/अपोस्टाईल किया जाता है। इसके बाद ही कोई दस्तावेज विदेशों में मान्य होते हैं। कतिपय आवेदक दिल्ली में ही प्रमाणीकरण/अपोस्टाईल के लिए आवेदन जमा करना चाहते हैं, वैसी स्थिति में उनकी सुविधा के लिए स्थानिक आयुक्त, स्थानिक आयुक्त कार्यालय, बिहार भवन, नई दिल्ली नामित हैं।

केन्द्र सरकार द्वारा दस्तावेजों के वैधानिकीकरण हेतु ऑन-लाईन पोर्टल "e-Sanad" की शुरूआत भी की गयी है। इस पोर्टल के माध्यम से केवल वैसे प्रमाण-पत्र ही वैधीकृत किये जा सकते हैं, जो डिजीलॉक पर उपलब्ध है। अन्य की स्थिति में मैनुअली भी प्रतिहस्ताक्षरण किये जाने हैं।

5. NORI (No Obligation to Return to India):

(क) अमेरिकी वीजा कानूनों में J1, J2 वीजा को H1, H2 वीजा में रूपांतरण के लिए संबंधित देश के निकटतम दूतावास से NORI प्रमाण-पत्र के आधार पर कतिपय शर्तों में छूट का प्रावधान है।

(ख) NORI प्राप्त करने की प्रक्रियाःप्रथम चरण:-दूतावास को आवेदन (आठ प्रतियों में)

द्वितीय चरण:-मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, राज्य के गृह विभाग एवं क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से अनापत्ति प्राप्त करना। गृह विभाग (विशेष शाखा) के स्तर से की जाने वाली कार्रवाई की कार्यप्रवाह तालिका

गृह विभाग (विशेष शाखा)

प्राप्त दोनों प्रतिवेदनों के आधार पर संबंधित दूतावास को विदेश मंत्रालय (Diplomatic Bag) के माध्यम से अनापत्ति का संसूचन।

  • राज्य विशेष शाखा से प्रतिवेदन प्राप्त करना
  • जिला पदाधिकारी से प्रतिवेदन प्राप्त करना

6.Madad Portal:

प्रवासी/विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों से संबंधित किसी भी समस्या के संदर्भ में सहायता पहुँचाने के लिए विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा Madad Portal विकसित किया गया है, जिसपर दर्ज शिकायतों पर सीधी एवं त्वरित कार्रवाई विदेश मंत्रालय द्वारा की जाती है। तत्संबंधी भारत सरकार का बेवसाईट www.madad.gov.in है।