राज्य सरकार कल्याणकारी दायित्व के निर्वहन हेतु राज्य के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने एवं संपत्तियों की रक्षा हेतु सतत प्रयत्नशील है। मंदिरों में रखी बहुमूल्य मूर्तियाँ, मुकुट, छत्र, आभूषण आदि की सुरक्षा हेतु मंदिरो की पक्की मजबूत चहारदीवारी का निर्माण कराये जाने का राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है। मंदिर चहारदीवारी निर्माण हेतु बिहार राज्य भवन निर्माण निगम को निर्माण एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। चूंकि राज्य में पूर्व से कब्रिस्तान की जमीन की चहारदीवारी का निर्माण कार्य स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा कराया जा रहा है, अतएव मंदिर के चहारदीवारी के निर्माण का कार्य भी स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन से ही कराया जाना उपयुक्त मानते हुए योजना के प्रशासी विभाग, विधि विभाग के स्थान पर गृह विभाग, बिहार, पटना को बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का कार्य राज्य योजना मद से गृह विभाग (विशेष शाखा) के द्वारा कराया जाएगा तथा इसके क्रियान्वयन के लिए बिशा-निर्देश निम्नवत होंगे :
अर्हताएँ
किसी मंदिर के चहारदीवारी के निर्माण के लिए निम्नलिखित अर्हताएँ आवश्यक होंगी :
i) "मंदिर” से कोई देवालय, मठ या कोई भी पूजा-स्थल अभिप्रेत होगा
ii)मंदिर को सार्वजनिक होना
iii)मंदिर का निबंधन बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में होना
iv)मंदिर के पास चहारदीवारी के लिए अपनी जमीन का होना
v) मंदिर का निर्माण कम-से-कम साठ साल पहले हुआ हो या ऐसे मंदिर हो जिसके निर्माण से बिहार में पर्यटन की संभावना बढ़ती हो या ऐसे मंदिर जहाँ विधि-व्यवस्था या सुरक्षा का प्रश्न उत्पन्न हो गया हो
vi)"बिहार अनधिकृत धार्मिक संरचना निर्माण सर्वेक्षण एवं विनियमन, पुनस्र्थापन एवं इसका निराकरण (Removal) नियमावली 2013" के अन्तर्गत अनधिकृत धार्मिक संरचना के रूप में चिन्हित अथवा परिभाषित न हो
स्थल चयन
मंदिर की चहारदीवारी के निर्माण के लिए स्थल चयन निम्नरूपेण होगाः
(i) जिला स्तर पर मंदिरों की चहारदीवारी निर्माण के लिए उसका चयन जिला स्तरीय दो सदस्यीय समिति द्वारा किया जायेगा ।
(ii) प्रत्येक जिला में समिति के अध्यक्ष जिला पदाधिकारी होंगे और उसके सदस्य पुलिस अधीक्षक होंगे।
निर्माण एजेन्सी एवं योजना का क्रियान्वयन
(i)"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना के तहत राज्य में मंदिरों की पक्की चहारदीवारी का निर्माण योजना एवं विकास विभाग, पटना के नियंत्रणाधीन कार्यरत स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के माध्यम से कराया जाएगा।
(ii)चहारदीवारी की ऊँचाई लगभग 8 फीट होगी।
(iii) जिला पदाधिकारी द्वारा योजना के शुरूआत में मात्र एक बार जिलान्तर्गत पंजीकृत सभी मंदिरों की सूची की मांग धार्मिक न्यास पर्षद से की जायेगी। ततपश्चात् इन मंदिरों की संवेदनशीलता एवं मूर्तियों की चोरी के दृष्टिकोण से आसन्न खतरे के बिन्दु पर कण्डिका 3 (i) में गठित समिति द्वारा स्वतंत्र रूप से सर्वेक्षण कराया जायेगा तथा इसके आधार पर मंदिरों की चहारदीवारी के निर्माण के लिए जिला स्तर पर एक प्राथमिकता सूची तैयार की जायेगी। योजना का अग्रेतर कार्यान्वयन जिला स्तरीय समिति द्वारा इस प्राथमिकता सूची के आधार पर किया जायेगा |
(iv) जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा स्थल चयन के उपरांत योजना की रवीकृति संबंधित जिला पदाधिकारी द्वारा दी जायेगी तथा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा उसका प्राक्कलन तैयार किया जाएगा।
(v) प्राक्कलन पर सक्षम स्तर से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करते हुए अपेक्षित राशि के आवंटन हेतु अधियाचना संबंधित जिला पदाधिकारी के माध्यम से गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना को भेजी जाएगी।
(vi)अधियाचित राशि गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना द्वारा संबंधित स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता को विमुक्त (आवंटित की जाएगी।
(vii)जिला पदाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं समीक्षा समय-समय पर की जाएगी तथा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन चहारदीवारी का निर्माण कार्य विनिश्चित अवधि में पूर्ण करेगा।
(viii)राशि की प्राप्ति के तीन माह के भीतर स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा कार्य प्रारंभ किया जाना अनिवार्य होगा।
(ix)स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के संबंधित कार्यपालक अभियंता राशि के व्यय के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी होंगे।
योजना का अनुश्रवण
"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना के क्रियान्वयन का अनुश्रवण मुख्य सचिव, बिहार के स्तर से किया जायेगा।
योजना की स्वीकृति
"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना अन्तर्गत चहारदीवारी निर्माण से संबंधित प्राक्कलन की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति हेतु वित्तीय राशि की अधिसीमा निम्नवत होंगेः
प्रशासनिक स्वीकृति
| सक्षम पदाधिकारी |
स्वीकृति हेतु अधिसीमा |
| प्रधान सचिव/सचिव, गृह विभाग |
2 करोड़ रूपये से 2.5 करोड़ रूपये तक |
| प्रमण्डलीय आयुक्त |
50 लाख से 2 करोड़ रूपये तक |
| जिला पदाधिकारी |
50 लाख रूपये तक |
तकनीकी स्वीकृति
| सक्षम पदाधिकारी |
स्वीकृति हेतु अधिसीमा |
| मुख्य अभियंता |
2 करोड़ रूपये से 2.5 करोड़ रूपये तक |
| अधीक्षण अभियंता |
50 लाख से 2 करोड़ रूपये तक |
| कार्यपालक अभियंता |
50 लाख रूपये तक |
विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |