गृह रक्षा वाहिनी स्वयंसेवी संगठन है। इसका उद्देश्य विधि-व्यवस्था संधारण में पुलिस को सहायता करना, विशेष स्थिति में कार्य करना, अपातकालीन स्थिति में आवश्यक सेवाओं का बनाए रखना एवं आपदा प्रबंधन का कार्य करना है। विगत वर्षों में बिहार गृह रक्षा वाहिनी की भूमिका में काफी विस्तार हुआ है । गृह रक्षकों की कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति उनके दैनिक भत्ते एवं कल्याणकारी सुविधाओं में वृद्धि हुई है। समाज के लिए गृहरक्षकों की भूमिका एवं योगदान और महत्त्वपूर्ण हो गया है।
बिहार गृह रक्षा वाहिनी में नियमित कर्मियों की काफी कमी है। गृह रक्षा वाहिनी कार्यालयों में गृहरक्षकों से संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता एवं संधारण संतोषजनक नहीं है। गृहरक्षकों की कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति एवं भुगतान में अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं अपारदर्शिता की शिकायत मिलती है। अभिलेखों का संधारण संतोषजनक नहीं होने एवं पारदर्शिता के अभाव के कारण इस पर नियंत्रण करना कठिन भी होता है।
गृह रक्षा वाहिनी संगठन में गृहरक्षकों से संबंधित अभिलेखों का संधारण सुनिश्चित करने, उनकी प्रतिनियुक्ति एवं भत्ता भुगतान में भ्रष्टाचार को रोकने, उसमें अनियमितता एवं मनमानी को समाप्त करने तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए गृह विभाग, बिहार सरकार द्वारा गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना को लागू किया गया है। इसके अन्तर्गत गृह रक्षा वाहिनी के सभी जिला कार्यालयों में गृहरक्षकों से संबंधित सभी अभिलेख, उनकी प्रतिनियुक्ति तथा उनके मानदेय भुगतान को कम्प्यूट्रीकृत करने एवं सभी जिला कार्यालयों को आपस में तथा राज्य मुख्यालय से कम्प्यूटर नेटवर्किग से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। मुख्यालय, पटना में इसका राज्य स्तरीय केन्द्र (सेन्टर) है, जहां से इसकी मानिटिंग का प्रावधान है। इसके अन्तर्गत सभी जिलों के पुनर्नमांकित वैध गृहरक्षकों का डाटावेस बनाने के लिए उनसे संबंधित सारी अभिलेखीयें जानकारी को कम्प्यूट्रीकृत किया गया है। कुल 33 (तैतीस) कॉलम में प्रविष्टि का प्रावधान है। राज्य के पुनर्नमांकित 52239 गृहरक्षकों में से 51114 (लगभग 98 प्रतिशत) प्रविष्टि होने का रिपोर्ट है।
जो गृहरक्षक कहीं कर्तव्य पर प्रतिनियुक्त नहीं होंगे और नियमित कर्तव्य पर प्रतिनियुक्त होना चाहेंगे, पहले वे माह के प्रथम सोमवार को अपने जिला होमगार्ड कार्यालय जाकर रोस्टर पंजी में नाम अंकित कराते थे। इसी की सूची के आधार पर उन्हें कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति किए जाने का प्रावधान था। अब ऐसे गृहरक्षकों को रोस्टर में नाम लिखाने के लिए कार्यालय पर नहीं आना पड़ेगा। अब वे नियमित कर्त्तव्य हेतु अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से एक नंबर (01122901702) पर मिसकॉल करते है। इसी के आधार पर रोस्टर पंजी में उनका नाम अंकित हो जाता है तथा इसकी सूचना उन्हें उनके मोबाईल नंबर पर हिन्दी में मैसेज के माध्यम से चली जाती है। जब रिक्त स्थान पर या निर्धारित समय से अधिक से प्रतिनियुक्त या अन्य कारणों से बदले जाने वाले गृहरक्षकों से संबंधित प्रविष्टि कम्प्यूटर में की जाती है तब रोस्टर में मोबाईल के माध्यम से अपना नाम रजिस्टर्ड कराए (वर्तमान में इसके साथ आपवादिक स्थिति के लिए कम्प्यूटर से मैनूअल से ऑनलाईन भी नाम दर्ज कराने की व्यवस्था चल रही है) गृहरक्षकों की सूची में रैण्डमाइज सिस्टम से कमान पत्र निर्गत हो जाता है तथा उन गृहरक्षकों को उनके मोबाईल पर हिन्दी मैसेज से इसकी सूचना मिल जाती है। गृहरक्षक कमान को प्राप्त कर प्रतिनियुक्ति स्थान पर रिर्पोट करते है। ऐसे ही भत्ते की राशि गृहरक्षक के खाते में जाते ही उसके मोबाईल पर हिन्दी में मैसेज प्राप्त हो जाता है तथा गृहरक्षक को इसकी जानकारी लेने कार्यालय या बैंक का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। इसी प्रकार गृहरक्षक को कर्तव्य से विरमित होने, किसी प्रकार की सजा दिए जाने, उससे विमुक्ति, साठ वर्ष की उम्र सीमा पूर्ण होने पर सेवामुक्त होने की सूचना भी संबंधित गृहरक्षक को उनके मोबाईल पर हिन्दी में मैसेज द्वारा मिलने का प्रावधान है।
गृहरक्षकों की दो श्रेणी का प्रावधान है। पहली श्रेणी में सामान्य गृहरक्षक होते है जो सामान्य ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त होते है। दूसरी श्रेणी में विशिष्ट योग्यता वाले यथा चालक, टाइपिस्ट, कम्प्यूटर ऑपरेटर, नाई, धोबी, कूक, आवासीय परिसर में कार्य करने में निपुण आदि के गृहरक्षक होते है। गृहरक्षक अपने ही कोटि के गृहरक्षक से बदले जाते है। विशेष विधि-व्यवस्था कर्तव्य पर इसी प्रक्रिया से प्रतिनियुक्ति होती है। इसके तहत रजिस्ट्रेशन कराये गृहरक्षकों की संख्या यदि विशेष विधि-व्यवस्था कर्तव्य के लिए स्वीकृत संख्या के बराबर या उससे कम होगी तो रजिस्ट्रेशन कराने वाले सभी गृहरक्षकों को विशेष ड्यूटी के लिए आगमन हेतु उनके मोबाईल पर मैसेज देकर कॉलअप किया जाता है। यदि स्वीकृत संख्या रजिस्ट्रेशन कराये गृहरक्षकों से कम होती है तो रैण्डमाइज तरीके से गृहरक्षकों को मैसेज देकर कॉलअप किया जाता है। यदि उस विशेष कर्तव्य के लिए कॉलअप किये गृहरक्षकों से कम संख्या में गृहरक्षक आगमन कराते है तो सेमी पोस्ट से गार्ड कमांडर को मैसेज देकर या रजिस्ट्रेशन सूची के दूसरे गृहरक्षकों को मैसेज देकर कॉलअप किए जाने का प्रावधान है।
गृह रक्षा वाहिनी के गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना का परियोजना प्रस्ताव NIC, बिहार स्टेट सेंटर, पटना द्वारा तैयार किया गया है। इसके प्रथम वर्ष के लिए सरकार द्वारा रूपया 14305526=00 (एक करोड़ तैतालीस लाख पाच हजार पाँच सौ छब्बीस) मात्र की स्वीकृति है।
ई-कमान योजना को तीन एजेंसियों के माध्यम से लागू किया गया हैं। बेल्ट्रॉन को सभी जिला होमगार्ड कार्यालय को 01-01 की दर से कुल 40 एवं राज्य मुख्यालय गृह रक्षा वाहिनी पटना को 02 कुल 42 कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर, यू.पी.एस. आदि प्राप्त कराना था। बेल्ट्रॉन में सभी स्थानों पर कम्प्यूटर सामग्री प्राप्त करा दी है। इस पर कार्यपालक सहायक द्वारा कम से कम पांच गृहरक्षकों/कर्मियों को संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। इसमें वैसे कर्मी एवं गृहरक्षक को प्राथमिकता दी जाती है। जिनकी सेवा निवृति या सेवामुक्ति में कम से कम 05 वर्ष हो, जो कम से कम मैट्रिक पास हो और कम्प्यूटर कार्य के इच्छुक हो या पूर्व से जानकार हो।
बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाईटी (B.P.S.M) के माध्यम से सभी जिला होमगार्ड कार्यालय एवं मुख्यालय को B.P.S.M के जिला स्तरीये पैनल से जिला पदाधिकारी को आवंटित संख्या में कुल 42 कार्यपालक सहायक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ये कार्यपालक सहायक अपना कम्प्यूटर सेट एवं सिस्टम लेकर आयेंगें। इनके 1 वर्ष (12 माह) के मानदेय की राशि सभी जिला को जिला ई-गवर्नेस सोसाईटी या जिला पदाधिकारी को उनके खाता के माध्यम से प्राप्त करा दी गई है। अभी नवादा एवं सीतामढ़ी को छोड़कर शेष सभी जिलों में कार्यपालक सहायक कार्य कर रहे हैं।
एन.आई.सी. द्वारा इससे संबंधित मुख्य सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा हैं। सॉफ्टवेयर निर्माण के अन्तर्गत गृहरक्षकों का डाटा बेस बनाने, नियमित कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति, विशेष एवं आपातकालीन कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति, दूसरे जिला में प्रतिनियुक्ति आदि पर कार्य लगभग पूर्ण है। लेखा से संबंधित मांग पत्र, रसीद, भुगतान आदेश, भुगतान रॉल एवं विपत्र बनाने तथा लेखा संबंधित विवरणी बनाने पर कार्य किया गया है। वैशाली जिले में यह सफलता पूर्वक चल भी रहा है। दूसरे जिलाओ में इसे प्रारंभ कराया जा रहा है।
ई-कमान योजना को बिहार स्टेट डाटा सेंटर को क्लाउड सर्वर पर वेवसाइट होस्टिंग किया गया है। इसकी सुरक्षा ऑडिट के लिए राशि बेल्ट्रान को प्राप्त करा दी गई है।
परियोजना प्रस्ताव के आलोक में ई-कमान योजना के दूसरे वर्ष की स्वीकृति सरकार से प्राप्त है। दूसरे वर्ष के लिए रू. 7686552=00 (छिहतर लाख छियासी हजार पाँच सौ बावन) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति हैं। इसके अन्तर्गत 42 कार्यपालक सहायको के 12 माह की मानदेय की राशि तथा सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए NICSI, नई दिल्ली को दी जाने वाली राशि है।
वर्तमान के राज्य में सभी जिले में इस परियोजना के तहत रास्टर में नाम प्रविष्टि एवं सभी प्रकार की प्रतिनियुक्ति का कार्य चल रहा है। लेखा से संबंधित कार्य भी वैशाली जिला में चल रहा है तथा गया, सिवान एवं नालंदा जिलों में शुरू किया गया है। शेष जिलो में भी शीघ्र शुरू करने का निदेश है। गृहरक्षकों को कर्तव्य हेतु रास्टर में नाम रजिस्ट्रेशन होने, प्रतिनियुक्ति, विरमित होने, निलंबित होने, उससे मुक्त होने, सेवा मुक्त होने और भत्ते की राशि एवं अन्य राशि के भुगतान से संबंधित जानकारी SMS के माध्यम से उनके रस्टिर्ड मोबाईल नम्बर पर दी जाती है। इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सॉफ्टवेयर के प्रावधान के प्रशिक्षण के लिए, समस्या के समाधान तथा प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित अन्तराल पर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाती है जिसमें जिला समादेष्टा, अन्य पदाधिकारी, एवं कार्यपालक सहायक शामिल होते है।
बिहार में गृह रक्षा वाहिनी के गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना हमारी वर्तमान सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। बिहार में समाज के सबसे निचले तबके की बहुलता वाले इस स्वयंसेवी संगठन के कार्यों के संचालन में यह पारदर्शिता, ईमानदारी, तकनीक एवं आधुनिकता के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।